धान फसल में बढ़ा कंडूआ बीमारी का खतरा
धान फसल में बढ़ा कंडूआ बीमारी का खतराधान फसल में बढ़ा कंडूआ बीमारी का खतराधान फसल में बढ़ा कंडूआ बीमारी का खतराधान फसल में बढ़ा कंडूआ बीमारी का खतरा

भदोही, संवाददाता। अगार रोपे गए धान फसल में बालियां निकलने लगे हैं। खेतों में लहलहा रहे धान फसल को देख अन्नदाता फूले नहीं समा रहे हैं। लेकिन इन दिनों धान फसल में कंडूआ जैसे तमाम बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कृषिकों को विशेष सावधानी बरतने की जरुरत है। धान फसल में बीमारी का लक्षण दिखते ही अन्नदाता तत्काल कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें ताकि मेंहनत की कमाई बर्बाद होने से बच सके। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वैज्ञानिक डॉ. आरपी चौधरी ने बताया कि धान फसल में रोगों का प्रकोप एवं कीटों का आक्रमण भी हो रहा है।
यदि समय से इनकों नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका प्रभाव बढ़ सकता है। रोग की चपेट में आते ही किसानों की मेंहनत की कमाई काफी प्रभावित हो सकता है। धान में मुख्य रुप से लगने वाली बीमारियां धान का झुलसा, बीजाणु झुलसा, बकाने रोग, शीथ ब्लाइट रोग, ब्लास्ट या झोका रोग एवं आभासी कंडूआ या कंडो बीमारी प्रमुख हैं। धान में लगने वाले प्रमुख कीटो में दीमक, तना छेदक कीट, पत्ती लपेटक कीट, हिस्पा कीट, भूरा हापर तथा बाली से रस चूसने वाले कीट जैसे गंधी बग प्रमुख हैं। धान फसल की प्रमुख बीमारी जीवाणु झुलसा जिसमें पत्तियां किनारे से पीली पड़ने लगती हैं। बाद में सुखकर पुआल का रंग ले लेती है। इस बीमारी के नियंत्रण के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन एक प्रतिशत और कापर आक्सिक्लोराइड दो फीसदी घोल का छिड़काव करते हैं। इसी प्रकार झोंका रोग में आंख के आकार के भूरे धब्बे बनते हैं जो फफुंदी के संक्रमण के कारण बाली में भी पहुंच जाते हैं। सितंबर के महीने में धान में शीथ ब्लाइट रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है जिसमें धान में निचे से पत्तियों का आवरण झुलसने लगता है। ऐसे खेत में ज्यादा पानी हो तो उसे निकाल देना चाहिए और यूरिया का प्रयोग नहीं करना चाहिए।


