कजरी-बारहमासा और आल्हा से गूंजा नसरतपुर
भारतीय लोक महासंघ की नसरपुर में बैठक में कजरी, बारहमासा और आल्हा जैसे लोक विधाओं की प्रस्तुतियों से ग्रामीण लोक संस्कृति का समृद्ध परंपरा जीवंत हुई। लुप्त होती लोककलाओं के संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में प्रमुख कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं और ग्रामीणों ने ताली बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
भारतीय लोक महासंघ की नसरपुर में आयोजित बैठक में कजरी, बारहमासा और आल्हा जैसी लोक विधाओं की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। कार्यक्रम में लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से ग्रामीण लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया। इस दौरान लुप्त होती लोककलाओं के संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। बैठक की अध्यक्षता रामखेलावन मौर्य ने तथा संचालन सुभाष चंद्र ने किया। आयोजन गायक राजेंद्र कुमार, हरिश्चंद्र और छेदीलाल ने किया। प्रदेश अध्यक्ष कमलेशचंद्र यादव और जिला अध्यक्ष गुलाब चंद मौर्य की मौजूदगी में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डा. दीपचंद प्रजापति ने कहा कि आधुनिकता के दौर में पारंपरिक लोककलाएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं।
इन्हें संरक्षित करने के लिए कलाकारों और समाज को मिलकर प्रयास करना होगा। कार्यक्रम में लोक कलाकार राकेश कुमार कश्यप, बिरहा गायक अनिल कुमार यादव, कवि अमरनाथ, रामकृपा, रामखेलावन, रामचंद्र, संगीता देवी, गुड्डी देवी, सरिता देवी, आशा देवी, कवि सालिक राम और सुरेश चंद प्रजापति सहित अन्य कलाकारों ने कजरी, बारहमासा, आल्हा और लोकगीतों की प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर ग्रामीणों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया।


