छोटी नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए रूपरेखा तैयार
नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) ने छोटी नदियों को फिर से जीवित करने के लिए एक नई रूपरेखा पेश की है। एनएमसीजी के डायरेक्टर जनरल ने कहा कि छोटी नदियों के लिए विशेष दृष्टिकोण आवश्यक है। इससे पहले हुई राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने छोटी नदियों के लिए अनुकूल उपायों पर चर्चा की।

नई दिल्ली, एजेंसी। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) ने शुक्रवार को छोटी नदियों को फिर से जीवित करने के लिए एक रूपरेखा तैयार की है। इसमें कहा गया है कि नमामि गंगे जैसे बड़े नदी संरक्षण कार्यक्रम की तुलना में इनके लिए एक अलग नजरिए की जरूरत है। छोटी नदियों को फिर से जीवित करने (एसआरआर) की यह रूपरेखा राष्ट्रीय कार्यशाला में पेश की गई, जिसमें विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, सरकारी अधिकारी, राज्य सरकारें और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। एनएमसीजी के डायरेक्टर जनरल राजीव मित्तल ने बताया कि छोटी नदियों के सामने आने वाली चुनौतियां मध्यम और बड़ी नदियों की चुनौतियों से अलग हैं, इसलिए उन्हें फिर से जीवित करने के लिए अलग तरीके की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि निर्मल गंगा और अविरल गंगा के आधार पर बनी नमामि गंगे की रूपरेखा को सीधे छोटी नदियों पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि शहरी छोटी नदियों के लिए बिना रुकावट बहाव प्राथमिकता हो सकती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में प्राकृतिक जुड़ाव को बहाल करने, कैचमेंट ट्रीटमेंट और स्थानीय जल भंडारण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
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