41 वर्ष पुराने हमीद सेतु का एक करोड़ की लागत से कायाकल्प शुरू
रेवतीपुर में गंगा नदी पर स्थित 41 वर्ष पुराना हमीद सेतु का जीर्णोद्धार कार्य रविवार से शुरू हुआ। एनएचएआई द्वारा एक करोड़ रुपये की लागत से पुल के ऊपरी हिस्से की मरम्मत की जाएगी। इसके बाद पैदल पथ, डेंटिंग-पेंटिंग और एलईडी पोलों का भी सुधार होगा। पूरा काम एक सप्ताह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

रेवतीपुर, हिन्दुस्तान संवाद। गंगा नदी पर स्थित पूर्वांचल की जीवनरेखा माने जाने वाले 41 वर्ष पुराने हमीद सेतु के व्यापक जीर्णोद्धार का कार्य रविवार से शुरू हो गया। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) करीब एक करोड़ रुपये की लागत से पहली बार सेतु का कायाकल्प करा रहा है। अभियान के पहले चरण में अत्याधुनिक मिलिंग मशीन से पुल के ऊपरी हिस्से की पुरानी वेयरिंग कोट हटाने का कार्य शुरू किया गया। इसके बाद नई सतही परत बिछाकर सड़क को पूरी तरह समतल किया जाएगा, जिससे वाहन चालकों को झटकों से राहत मिलेगी और आवागमन अधिक सुरक्षित होगा। एनएचएआई के अनुसार, वेयरिंग कोट का कार्य पूरा होने के बाद पैदल पथ की मरम्मत, डेंटिंग-पेंटिंग, लोहे की रेलिंग का सुधार तथा एलईडी पोलों का रंग-रोगन भी कराया जाएगा।
लगभग 1050 मीटर लंबा यह डबल लेन सेतु 14 पिलरों, 52 बेयरिंग और 25 एक्सपेंशन ज्वाइंट्स पर आधारित कैंटीलीवर सस्पेंडेड तकनीक से निर्मित है। इसकी आधारशिला वर्ष 1975 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने रखी थी, जबकि वर्ष 1984-85 में इसे यातायात के लिए खोला गया था। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन इस पुल से होता है। निर्माण कार्य के दौरान यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए दोनों ओर डायवर्जन लागू किया गया है और ट्रैफिक पुलिस के साथ स्थानीय पुलिस बल की तैनाती की गई है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक अजय सिंह ने बताया कि निर्धारित एक सप्ताह के भीतर कायाकल्प कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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