Retirement benefits cannot be denied even appointment is for short term Big decision of Supreme Court in favor of employees - India Hindi News सेवानिवृति लाभ से नहीं कर सकते इनकार, भले ही शॉर्ट टर्म के लिए हुई हो नियुक्ति; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, India Hindi News - Hindustan
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सेवानिवृति लाभ से नहीं कर सकते इनकार, भले ही शॉर्ट टर्म के लिए हुई हो नियुक्ति; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court News: दो जजों की खंडपीठ ने अपने फैसले में लिखा कि अपीलकर्ताओं ने 30 से 40 साल तक काम किया है। इसलिए, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों से वंचित करना अनुचित होगा।

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीTue, 11 June 2024 03:46 PM
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सेवानिवृति लाभ से नहीं कर सकते इनकार, भले ही शॉर्ट टर्म के लिए हुई हो नियुक्ति; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसले में कहा है कि अगर किसी कर्मचारी ने 30 से 40 साल तक सेवा दी हो तो उसे रिटायरमेंट बेनिफिट से वंचित नहीं कर सकते हैं, भले ही उसकी नियुक्ति अल्पकाल के लिए शॉर्ट टर्म के आधार पर हुई हो। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने 7 मई के अपने आदेश में कहा कि 30 से 40 साल तक काम करने के बाद किसी भी कर्मचारी को सेवानिवृति लाभ से वंचित करना गलत है।

लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खंडपीठ ने अपने फैसले में लिखा कि अपीलकर्ताओं ने 30 से 40 साल तक काम किया है। इसलिए, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों से वंचित करना अनुचित होगा। खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट तौर पर लिखा कि वर्तमान आदेश अपीलकर्ताओं की सर्विस की लंबी अवधि को देखते हुए और विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर पारित किया गया है।

दरअसल, 1981 में उत्तर प्रदेश को अविभाजित गोरखपुर जिले में अल्पकाल के लिए 14 सहायक वासिल बाकी नवीस (AWBNs) की नियुक्ति हुई थी। बाद में गोरखपुर से एक और जिला महाराजगंज बन गया। जिला बंटवारा होने के बाद 14 में से 5 AWBN महाराजगंज चले गए और 9 गोरखपुर में ही रहे। 26 जून 1991 को महाराजगंज के जिलाधिकारी ने उन पांचों AWBN की सेवा स्थायी कर दी लेकिन इसकी शिकायत होने के बाद अक्तूबर 1992 में  आदेश पलटते हुए स्थायीकरण  रद्द कर दिया गया।

बाद में इन पांचों कर्मियों ने अपने स्थायीकरण को रद्द करने के आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने टर्मिनेशन आदेश पर रोक लगाते हुए कर्मियों को बड़ी राहत दी और उन्हें काम करते रहने का आदेश दिया। हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश पर कर्मी काम करते रहे। बाद में एकल पीठ ने अक्टूबर 1992 के आदेश को रद्द कर दिया। इसके अलावा, सिंगल बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि अपीलकर्ताओं को 26 जून, 1991 से सभी लाभों के साथ उनकी सेवा नियमित मानी जाएगी। 

बाद में हाई कोर्ट की डबल बेंच ने इस आदेश को खारिज कर दिया और निर्देश दिया कि इन कर्मियों की सेवा अवधि को सेवानिवृत्ति और पेंशन संबंधी लाभों के लिए नहीं गिना जाएगा। इसके खिलाफ ये कर्मी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए, जहां जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने  हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा और इन कर्मियों को सेवानिवृति के बाद मिलने वाले सभी लाभों का हकदार माना। इस बीच, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाती उन पांच में से तीन कर्मी 2018, 2019 और 2022 में रिटायर हो गए लेकिन कोर्ट ने सभी को रिटायरमेंट लाभ देने का निर्देश दिया है।