चिगलौआ प्रकरण में बड़े आन्दोलन की रूपरेखा बना रहे शिक्षक संगठन
ललितपुर में सेवानिवृत्त शिक्षक राजाराम गोस्वामी ने आत्महत्या की। उन्होंने पूर्व डीजी सहित छः लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया। मृतक की शिक्षिका पुत्री आंदोलन की तैयारी कर रही हैं। शिक्षक संगठन भी कार्रवाई की मांग कर सकते हैं। स्थिति की निगरानी के लिए पुलिस और खुफिया तैनात हैं।

ललितपुर। सेवानिवृत्त शिक्षक की आत्महत्या के मामले में नामजद पूर्व डीजी सहित सभी आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए शिक्षक संगठन भी आन्दोलन कर सकते हैं। मृतक की शिक्षक पुत्री से सभी शिक्षक संगठन सम्पर्क में हैं और बड़ी लड़ाई की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। चौबीस वर्ष पहले 2002 के बहुचर्चित कांड के पीड़ित सेवानिवृत्त शिक्षक राजाराम गोस्वामी ने बीते बृहस्पतिवार को अपने घर में जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। मरने से पहले न्यायाधीश, एसपी और इंस्पेक्टर थाना बार के नाम लिखी चिट्ठी में उन्होंने तत्कालीन एसपी एवं पूर्व डीजी समेत छह लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया था।
पूर्व पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई
मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी को आरोपित बनाने के कारण जनपद पुलिस ने काफी खींचतान के बाद पूर्व डीजी सहित गोकुल प्रसाद पुत्र अजुद्दी बरार, कामता प्रसाद पुत्र अजुद्दी, देवेन्द्र कुमार पुत्र विद्याधर तिवारी, गुलाब पुत्र गोकुल प्रसाद बरार, छोटलाल पुत्र खंजिया बरार निवासीगण चिगलौआ के खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इसके बाद ही मृतक के परिजनों ने शव लेकर अंतिम संस्कार किया था। इसके बाद से गांव में पीएसी तैनात है। पुलिस अफसर बराबर गश्त कर रहे हैं। गांव में सक्रिय खुफिया भी प्रत्येक गतिविधियों की जानकारी आला अफसरों तक पहुंचा रही है। उधर, मृतक के परिजन तेरह दिन की क्रियाओं में लगे हैं। इन सब के बीच पीड़ित परिवार के सदस्य भी पुलिस की कार्रवाई पर नजर रखे हैं। बीते रोज मृतक के पुत्र ने मामले की सीबीआई जांच को मांग उठाई, वहीं उनकी शिक्षक पुत्री अर्चना मिश्र पत्नी लालबहादुर मिश्र निवासी आवास विकास झांसी ने भी शिक्षक संगठनों को जोड़कर बडे़ आंदोलन की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। दरअसल, मृतक स्वयं बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर तैनात रहे थे और उनकी पुत्री भी झांसी के बबीना ब्लाक के गागौनी गांव स्थित विद्यालय में सहायक अध्यापिका हैं। इस कारण बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के विभिन्न संगठन इस मामले को लेकर बेहद गंभीर हैं और एक साथ मिलकर इस लड़ाई में कूंद सकते हैं। हालांकि वह इस मामले में फिलहाल पुलिस के अगले कदम पर नजर टिकाए हैं।
24 वर्ष पहले का चिगलौआ कांड
बंद कर दिए थे जिले भर के स्कूल। 24 वर्ष पहले वर्ष 2002 में चिगलौआ कांड के बाद शिक्षक राजाराम गोस्वामी को जब पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा था, तब भी बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों मिलकर बड़ा आंदोलन किया था। जनपद के सभी शिक्षकों ने अपने-अपने स्कूलों में ताला बंद करके अधिकारियों को चाबी सौंप दी थी। इससे तत्कालीन प्रशासनिक और पुलिस अफसरों के हाथ पांव फूल गए थे। जिसके बाद अफसरों ने जेल जाकर राजाराम गोस्वामी सहित सभी आरोपितों से मुलाकात की थी.


