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ज्ञानवापी: व्यास तहखाने में पूजा की अनुमति देने वाले रिटायर्ड जज को अहम जिम्मेदारी, यूनिवर्सिटी के लोकपाल नियुक्त

व्यासजी के तहखाने में पूजा की अनुमति देने वाले रिटायर्ड जज एके विश्वेश को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में तीन साल के लिए लोकपाल बनाया गया है।

ज्ञानवापी: व्यास तहखाने में पूजा की अनुमति देने वाले रिटायर्ड जज को अहम जिम्मेदारी, यूनिवर्सिटी के लोकपाल नियुक्त
Madan Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊThu, 29 Feb 2024 07:27 PM
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वाराणसी की ज्ञानवापी के दक्षिणी हिस्से में बने व्यास जी के तहखाने में पूजा की अनुमति देने वाले रिटायर्ड जिला जज एके विश्वेश को लखनऊ स्थित यूनिवर्सिटी का लोकपाल नियुक्त किया गया है। जिला जज ने अपने आखिरी कार्यदिवस के दिन ज्ञानवापी मामले में सुनवाई करते हुए व्यास जी तहखाने में पूजा की इजाजत दी थी, जिसके बाद वहां लगभग दो दशकों के बाद पूजा-अर्चना की शुरुआत हो सकी। अब रिटायर्ड जज एके विश्वेश को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में तीन साल के लिए लोकपाल बनाया गया है। 

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, रिटायर्ड जज एके विश्वेश की नियुक्ति यूजीसी के नियमों के तहत की गई है। नियम हैं कि यूनिवर्सिटीज और उससे संबंधित कॉलेजों व संस्थानों को स्टूडेंट्स की शिकायतों के निपटारे के लिए एक लोकपाल नियुक्त करना जरूरी होगा और यह लोकपाल एक रिटायर्ड कुलपति, रिटायर्ड प्रोफेसर या एक फिर रिटायर्ड जिला न्यायाधीश हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि 31 जनवरी को वाराणसी की जिला जज की अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में स्थित व्यासजी के तहखाने में पूजा करने का अधिकार दिया था। इस पर हिंदू पक्ष ने जहां खुशी जताते हुए बड़ी जीत बताया था, तो वहीं मुस्लिम पक्ष काफी नाराज दिखाई दिया था। यह तहखाना ज्ञानवापी के दक्षिणी दिशा में स्थित है। 1993 तक सोमनाथ व्यास का परिवार यहां पूजा अर्चना किया करता था, लेकिन फिर लोहे की बैरिकेडिंग लगा दी गई, जिससे वहां पूजा पाठ भी बंद हो गई।  

नवंबर 1993 में पुजारियों और भक्तों को मौखिक आदेश देकर वहां पूजा-पाठ करने से रोका गया था। पिछले साल तहखाने में दोबारा पूजा पाठ करने के लिए व्यास जी के नाती ने अदालत से गुहार लगाई थी। याचिका दायर कर पूजा पाठ की अनुमति मांगी गई थी। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए अंजुमन इंतजामिया के वकील ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि कोर्ट ने सिर्फ रिसीवर नियुक्त करने का जिक्र किया है और उसमें पूजा अधिकार का कोई जिक्र नहीं है।

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