डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर्ड कर्नल से 8.20 लाख ठगे
नोएडा में एक रिटायर्ड कर्नल से साइबर अपराधियों ने 8.20 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी। पीड़ित ने शिकायत करने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। लोगों को धोखाधड़ी के मामलों में सावधान रहने की सलाह दी गई है।

नोएडा,वरिष्ठ संवाददाता। साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर सेना के एक रिटायर्ड कर्नल से 8.20 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी। ठगों ने ऑनलाइन कोर्ट की फर्जी कार्यवाही कराकर खुद को जज और जांच अधिकारी भी बताया। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। सेक्टर-37 स्थित अरुण विहार निवासी 70 वर्षीय रिटायर्ड कर्नल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि इसी साल 20 मई को सुबह करीब 10 बजे उनके पास एक कॉल आई।
कॉल करने वाले ने खुद को विजय खन्ना बताते हुए शिकायतकर्ता से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर मुंबई में फर्जी बैंक खाता खोला गया है, जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। ऐसे में वह जांच के दायरे में हैं और उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। साथ ही किसी से भी इस बारे में बात न करने की हिदायत दी गई। अगले चरण में एक अन्य व्यक्ति ने खुद को सीबीआई का वरिष्ठ जांच अधिकारी आकाश कुल्हारे बताया और वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ शुरू कर दी। अगले दिन पीड़ित की ऑनलाइन कोर्ट में पेशी कराई गई, जहां जज, वकील और कोर्ट जैसा पूरा सेटअप दिखाया गया। कथित जज ने जांच पूरी होने तक धनराशि को एनसीआरबी के कथित एसएसए खाते में जमा कराने का आदेश दिया। सरकारी कार्रवाई समझकर पीड़ित ने 21 मई को अपने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक खाते से आरटीजीएस के जरिए 8 लाख 20 हजार 946 रुपये बैंक के खाते में भेज दिए। पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम नई दिल्ली के उत्तम नगर स्थित एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की शाखा में रिंकी कुमारी के नाम से संचालित खाते में भेजी गई। साइबर थाना पुलिस बैंक खाते की केवाईसी, लेनदेन का रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है। साथ ही ठगी की रकम फ्रीज कराने और गिरोह के सदस्यों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सीबीआई, ईडी, पुलिस या किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता। यदि कोई व्यक्ति इस तरह की धमकी देकर रुपये मांगता है तो तुरंत कॉल काटकर 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर क्राइम थाने में शिकायत करें।


