पराया कर दिए जाने के बाद वृद्धा आश्रम में बुजुर्ग सबसे अधइिक बच्चों को करते हैं याद
प्रभात कुमार नई दिल्ली। अपने बच्चों द्वारा पराया कर दिए जाने के बाद वृद्धा आश्रम

प्रभात कुमार नई दिल्ली।
अपने बच्चों द्वारा पराया कर दिए जाने के बाद वृद्धा आश्रम में रहने में लिए मजबूर बुजुर्गों को अपनों का गम सता रहा है। देश में वृद्धा आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग अपने जीवन साथी से अधिक अपने बच्चों को याद करके समय गुजारते हैं। हालांकि ऐसे बुजुर्गों की भी कोई कमी नहीं है, जो किसी को भी याद नहीं करते। इसका खुलासा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा पूर्वोत्तर और पश्चिम भारत के वृद्धा आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की ‘जीवन में संतुष्टि और गुणवत्ता’ के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए किए गए शोध में हुआ है। इसमें कहा गया है कि पश्चिम की तुलना में पूर्वोत्तर के बुगुर्ग अधिक खुश है。
एनएचआरसी की शोध रिपोर्ट
के मुताबिक पूर्वोत्तर हो या पश्चिम भारत, दोनों ही क्षेत्रों के वृद्धा आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग अपने जीवन साथ ही से अधिक बच्चों को याद रकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अधिक अपने बच्चों को याद करते हैं पूर्वोत्तर के 43.33 फीसदी बुजुर्ग बच्चों को याद करके समय गुजारते हैं जबकि पश्चिम भारत के 37 फीसदी बुजुर्ग बच्चों को याद करते हैं। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वोत्तर की तुलना में पश्चिम भारत के वृद्धा आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग अपनी पत्नी को अधिक याद करते हैं। पूर्वोत्तर के महज 15 फीसदी तो पश्चिम के 23 फीसदी बुजुर्ग आश्रम में अपनी जीवन साथी को याद करके समय काटते है। लेकिन देश के दोनों हिस्सों के लगभग 32 फीसदी बुजुर्ग अपनी जिंदगी जीने में मस्त हैं और किसी को याद नहीं करते हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग के सहयोग से पूर्वोत्तर भारत के असम और मणिपुर राज्यों और पश्चिम भारत के महाराष्ट्र और गुजरात के वृद्धा आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के बारे में यह शोध किया है। इस शोध का मकसद देश के दोनों क्षेत्रों में वृद्धा आश्रम में रहने वाले ‘बुजुर्गों की जीवन संतुष्टि और जीवन की गुणवत्ता’ तुलना करना था। इसके मुताबिक ओल्ड एज होम में कुछ ऐसे भी बुजुर्ग मिले, जो अपने रिश्ते-नातेदारों के बजाए अपनी दोस्तों को याद करते हैं।
वृद्धा आश्रम में खुश रहते हैं बुजुर्ग
देश के दोनों हिस्सों के ओल्ड ऐज होम में रहने वाले 92 फीसदी से अधिक बुजुर्ग काफी खुश रहते हैं। बुजुर्गों सर्वे के दौरान कहा कि उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है। पूर्वोतर के 92.78 फीसदी ने कहा कि उन्हें कोई परेशानी नहीं है, जबकि 2.78 फीसदी ने आश्रम में हिंसा की बात कबूल की। जबकि पश्चिम भारत में 91.52 फीसदी ने कहा कि कोई परेशानी नहीं हैं, लेकिन 4.09 फीसदी ने हिंसा की बात स्वीकार की।
समान रूप से उच्च रक्तचाप के शिकार हैं दोनों तरफ बुजुर्ग
रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वोत्तर और पश्चिम भारत के वृद्धा आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की बीमारी की स्थिति समान है। आंकड़ों के मुताबिक पूर्वोत्तर में 45.56 फीसदी और पश्चिम में 44.73 फीसदी बुजुर्ग उच्च रक्तचाक के शिकार हैं। हालांकि पश्चिम भारत के बुजुर्गों में मधुमेह की बीमारी अधिक है। पश्चिम भारत में 19 फीसदी बुजुर्गों को मधुमेह की बीमारी है जबकि पूर्वोत्तर में महज 12 फीसदी। गठिया की बीमार दोनों हिस्सों में करीब करीब एक समान है।
पूर्वोत्तर में साफ सुथरा है वृद्धा आश्रम
रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वोत्तर के वृद्धा आश्रम में पश्चिम की तुलना में अधिक साफ सफाई है। इसमें कहा गया है कि पूर्वोत्तर में 61.67 फीसदी साफ सफाई दिखा। जबकि पश्चिम में 55. 84 फीसदी।


