धान की 39 संकर प्रजातियों पर होगा शोध परीक्षण
आजमगढ़ के कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा में 39 संकर धान प्रजातियों पर शोध परीक्षण शुरू हुआ है। यह जनपद की जलवायु के अनुसार ट्रांसप्लांटिंग तकनीक से किया जाएगा। इस शोध का मुख्य उद्देश्य धान की उत्पादकता बढ़ाना है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एलसी. वर्मा और अन्य ने इसे आत्मनिर्भरता के लिए मील का पत्थर बताया।

आजमगढ़, संवाददाता। कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा में धान की 39 संकर प्रजातियों पर शोध परीक्षण शुरू होगा। इन प्रजातियों का जनपद की अनुकूलन जलवायु के आधार पर ट्रांसप्लांटिंग तकनीक से परीक्षण किया जाएगा। बीज प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक राजन कुमार की निगरानी में शोध कार्य होगा। धान की उत्पादकता बढ़ाने में यह शोध मिल का पत्थर साबित होगा। कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एलसी. वर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद लखनऊ के महानिदेशक डॅ. संजय सिंह के निर्देशन में शोध शुरू हुआ है। 39 प्रकार की धान की जीनोटाइप और 9 कंट्रोल उपचार प्रजाति का प्रयोग कर धान का परीक्षण होगा।
बीज प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक राजन कुमार ने बताया कि रेंडोमाइज्ड ब्लॉक डिजाइन तकनीक के आधार पर एक जीनोटाइप का 3 रेपलीकेशन होगा। इस प्रकार कुल 117 प्लाट तैयार कर ट्रांसप्लांटिंग की जाएगी। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र प्रताप गौतम ने बताया कि फंफूद जनित रोगों से बचाव के लिए बीज का शोधन कार्बेंडाजिम रसायन 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से किया गया है। जीवाणुज झुलसा से बचाव के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन एंटीबायोटिक 6 ग्राम मात्रा से बीज शोधन किया गया। कृषि वैज्ञानिक डा. पवन कुमार आनंद और आदित्य कुमार ने बताया कि नई प्रजातियों पर शोध कर जिले की उत्पादकता बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए यह परीक्षण मील का पत्थर साबित होगा।


