अररिया: क्रांतिकारियों का नारा था-सलामी और गुलामी हटाओ
रूपौली, पूर्णिया में 25 अगस्त को वीर शहीदों की याद में शहीद दिवस मनाया जाता है। 1942 में महात्मा गांधी के 'करो या मरो' नारे के साथ, स्थानीय क्रांतिकारियों ने तिरंगा फहराने के लिए संघर्ष किया। इस दिन पर कई शहीदों की याद में पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा।

रूपौली, पूर्णिया से धीरज क्रांतिकारियों की धरती के नाम से अपनी एक अलग पहचान रखने वाला रूपौली में 25 अगस्त को वीर शहीदों को याद किया जाता है। 1942 में जब महात्मा गांधी ने करो या मरो का नारा दिया तब पूरा रूपौली इस नारे के साथ लोग अपने प्राणों को देश के लिए न्यौछावर करने को तैयार हो गया। रूपौली की धरती क्रांतिकारियों की धरती है। बुजुर्गों ने बताया कि 25 अगस्त 1942 को रूपौली में हजारों की संख्या में क्रांतिकारी जमा हो गए। सोशलिस्ट पार्टी से बने रूपौली के प्रथम विधायक मोहित लाल पंडित ,पूर्व विधायक आनंदी प्रसाद सिंह ,बैजनाथ चौधरी क्रांतिकारियों का नेतृत्व कर रहे थे।
क्रांतिकारी थाना पर अपना तिरंगा झंडा फहराने के लिए तत्कालीन थानेदार से विनम्रता पूर्वक अपनी बातों को रखा लेकिन थानेदार नहीं माने। थानेदार से बातें नहीं बनती देख क्रांतिकारी उग्र हो गए और एक साथ थाना पर हमला बोल दिया। जंगे आजादी की लड़ाई में यहाँ के ऐतिहासिक क्रांतिकारियों का एक ही नारा था सलामी और गुलामी हटाओ। प्रखण्ड क्षेत्र के क्रांतिकारियों के जत्थे ने 25 अगस्त 1942 को रूपौली थाना को आग के हवाले कर दिया था लेकिन यहाँ के पाँच क्रांतिकारी पुलिस की गोली के शिकार हो गए। इसमें शहीद वीर अमर शहीदों में सुकदेव भगत,पाँचू बैठा,जागेश्वर सहनी,बंगाली सुरैया और सूर्यनारायण मंडल शामिल थे। इस घटना ने अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दिया। 25 अगस्त को शहीद दिवस पर यहां पुष्पांजलि अर्पित कर वीर शहीदों को याद किया जाता है। समाजसेवी कुंदन कुमार मंडल ने बताया कि रुपौली स्थित शहीद स्मारक पर 25 अगस्त को श्रद्धांजलि सभा-सह-सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया जाना है।


