महावीर को मानने के साथ महावीर की भी मानें
हिन्दुस्तान, कानपुर
कानपुर के श्री धर्मनाथ जैन कांच के मंदिर में चातुर्मास के दौरान पर्युषण पर्व के पंचम दिवस पर मुनि डॉ. संयमरत्न विजय और मुनि भुवनरत्न विजय ने महावीर के तप, ध्यान और ज्ञान के महत्व पर प्रवचन दिया। महावीर स्वामी का जन्म वाचन धूमधाम से मनाया गया और उनकी माता त्रिशला महारानी के 14 स्वप्नों का दर्शन कराया गया।

कानपुर। श्री धर्मनाथ जैन कांच का मंदिर, जैन भवन में चल रहे चातुर्मास के दौरान पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के पंचम दिवस शनिवार को मुनि डॉ.संयमरत्न विजय और मुनि भुवनरत्न विजय ने कल्पसूत्र प्रवचन देते हुए कहा कि महावीर तपवीर. जपवीर, ज्ञानवीर, दानवीर, शूरवीर व ध्यानवीर थे। महावीर ने तप से अधिक ध्यान को महत्व दिया है। हम महावीर को तो मानते हैं, लेकिन महावीर की नहीं मानते। श्री महावीर जन्म वांचन के साथ ही महावीर स्वामी का जन्मकल्याणक धूम धाम से मनाया गया। महावीर स्वामी की माता त्रिशला महारानी के देखे गए 14 स्वप्नों के दर्शन कराए गए और गौतम प्रसादी रखी गई।


