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सुप्रीम कोर्ट से राहत, लेकिन चंडीगढ़ में कमजोर हुई INDIA की ताकत; जानें मेयर पद का गणित 

Chandigarh: सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मेयर चुनाव की अध्यक्षता करने वाले रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह ने कुलदीप कुमार के पक्ष में डाले गए आठ मतपत्रों को खराब करने का जानबूझकर प्रयास किया।

सुप्रीम कोर्ट से राहत, लेकिन चंडीगढ़ में कमजोर हुई INDIA की ताकत; जानें मेयर पद का गणित 
Himanshu Jhaलाइव हिन्दुस्तान,चंडीगढ़।Wed, 21 Feb 2024 07:30 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चंडीगढ़ मेयर चुनाव के नतीजों को खारिज कर दिया। रिटर्निंग ऑफिसर ने आठ वोटों को अमान्य कर दिया था। इसके बाद भाजपा उम्मीदवार की जीत हुई थी। आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को चंडीगढ़ का नया मेयर घोषित किया गया। इंडिया गठबंधन इसे एक बड़ी जीत के तौर पर पेश कर रहा है। हालांकि, अब आंकड़े उनके पक्ष में नहीं हैं। थोड़े ही दिनों के बाद जब बहुमत साबित करने के लिए कहा जाएगा तो मामला फंस सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मेयर चुनाव की अध्यक्षता करने वाले रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह ने कुलदीप कुमार के पक्ष में डाले गए आठ मतपत्रों को खराब करने का जानबूझकर प्रयास किया।

क्या है मामला?
पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में मेयर का चुनाव लड़ा था। दोनों पार्टियों ने इसे इंडिया ब्लॉक का पहला रुख बताया था। विवादास्पद परिणाम में भाजपा उम्मीदवार मनोज कुमार सोनकर ने AAP-कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार कुलदीप कुमार को हरा दिया था। उनके पक्ष में डाले गए आठ वोट अवैध घोषित कर दिए गए थे। कुल पड़े 36 वोटों में से सोनकर को 16 वोट मिले। कुलदीप कुमार को 20 वोट मिले। आठ वोट अवैध घोषित कर दिए गए और सोनकर विजयी हुए।

आप ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह ने भाजपा उम्मीदवार को जिताने के लिए कुलदीप कुमार के पक्ष में डाले गए मतपत्रों में हेरफेर किया। मसीह के खिलाफ आरोप तब और तेज हो गए जब मतगणना कक्ष के सीसीटीवी फुटेज में मसीह को कैमरे की ओर देखते हुए मतपत्रों पर निशान लगाते हुए दिखाया गया। इसके बाद AAP ने रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह पर चुनाव प्रक्रिया में धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मतपत्रों की भौतिक जांच की और निष्कर्ष निकाला कि आठ मतपत्र जिन्हें रिटर्निंग अधिकारी अनिल मसीह ने अमान्य कर दिया था वे वैध थे। वे मत आप के मेयर पद के पक्ष में डाले गए थे। पीठ ने कहा कि अनिल मसीह ने याचिकाकर्ता के पक्ष में डाले गए आठ मतपत्रों को नष्ट करने का जानबूझकर प्रयास किया।

कोर्ट में सुनवाई से पहले मनोज सोनकर ने मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। मेयर पद के लिए नए सिरे से चुनाव की भी मांग की गई। हालांकि, अदालत ने यह कहते हुए नए चुनाव से इनकार कर दिया कि पीठासीन अधिकारी के कदाचार के कारण पूरे चुनाव को नहीं रद्द किया जा सकता है।

भले ही सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव में कुलदीप कुमार को विजेता घोषित कर दिया है, लेकिन इंडिया गठबंधन को परिषद में बहुमत साबित करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले चंडीगढ़ से AAP के तीन पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए। 30 जनवरी को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा के पास अकेले 14 वोट थे। अन्य दो वोट शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार के थे और एक पदेन सदस्य के तौर पर भाजपा सांसद किरण खेर का था।

आप के तीन पार्षदों-पूनम देवी, नेहा मुसावत और गुरुचरण काला के भाजपा में शामिल होने के साथ भाजपा के पास अब 19 का जादुई आंकड़ा है।

आपको बता दें कि आप-कांग्रेस गठबंधन को 20 वोट मिले थे। इनमें से आठ को रिटर्निंग ऑफिसर ने अवैध घोषित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही अब उन आठ वोटों को वैध ठहराया है, लेकिन इंडिया गठबंधन की संख्या 17 है। भाजपा अब आप-कांग्रेस गठबंधन से सदन में बहुमत साबित करने के लिए कह सकती है।

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