चार युवा कार सवारों ने की इंडो पाक बॉर्डर के गांव थांग तक की यात्रा
-19024 से अधिक ऊंचाई पर है थांग बॉर्डर का निर्जन क्षेत्र है यह -साथ ले गए थे ऑक्सीजन सिलेंडर भी फोटो:: 12 बिज 104- उम लिंग ला पर प्रमाण-पत्र व कार के

क्षेत्र के चार युवाओं ने स्कॉर्पियो से इंडो पाक बॉर्डर के व्यू पॉइंट 19024 से भी अधिक ऊंचे उम लिंग ला और थांग पहुंच कर रिकॉर्ड बनाया। दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्र में देश की सेना की सेवा से भी ये टूरिस्ट युवक प्रभावित हुए ।
यात्रा की जानकारी
इंडो पाक बॉर्डर के व्यू पॉइंट उम लिंग ला और थार से लौट कर चारो युवाओं के साथी प्रशांत चौहान निवासी शिवालाकला ने वहां की यादगारों को साझा किया। प्रशांत ने बताया कि उनके ही गांव के हर्षित राजपूत, गांव नैनुनांगल निवासी कावेंद्र सिंह व गांव भैंसा निवासी हिमांशु चौहान के साथ पंजाब के डेरा बसी व पंचकूला होते हुए बेहद दुर्गम पहाड़ी रास्तो से होते हुए अपना सफर पूरा किया। उन्होंने इंडो पाक बॉर्डर के अंतिम गांव तक की बेहद रोमांचक एव यादगार यात्रा के फोटो व यादगार लम्हो को साझा करते हुए बताया कि पहाड़ी रास्तो पर अधिकांशतः दूसरे व कभी कभी तीसरे गियर में उन्होंने स्कॉर्पियो से लगभग 3450 किलोमीटर की यात्रा पूरी की। उन्होंने बताया कि बॉर्डर के अंतिम छोर पर लगे पाकिस्तान के कैमरो के कुछ कदम पहले ही वहां मौजूद सैनिक ने यह कहते हुए रोक दिया कि दस्ते देश के कैमरे की जद में आने पर कानूनी कार्रवाई सम्भव है। तब बॉर्डर की कुछ कदम की दूरी पर फोटो लिए। थांग के लद्दाख बॉर्डर के समीप स्थित एक झोपड़ीनुमा कार्यालय से उन्हें गिनीज़ वर्ड रिकॉर्ड के प्रमाणपत्र भी उन्हें दिये गए। अपनी आठ दिन की यात्रा में उनके द्वारा चीन पाकिस्तान के बॉर्डर की यात्रा के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण कानो में होने वाली सनसनाहट की आवाज़ और सांस फूलने जैसी समस्या बताया। उन्हीने बताया कि वह एहतियात के तौर पर अपने साथ ऑक्सीजन को दो सिलेंडर और कपूर भी साथ लेकर गए थे।
यात्रा के अनुभव
जीवनपर्यंत याद रहने वाली यात्रा
इंडो पाक व चीन बॉर्डर की इस यात्रा को चारो युवकों ने रोमांचक तो रही। लेकिन हमारी सेना कैसे इस दुर्गम क्षेत्र में रहकर हमारे देश की रक्षा करते है ! वह दृश्य जीवनपर्यंत हमारे जहन में ताज़ा रहेंगें।


