चलते-चलते::जल्द उपलब्ध होगा इबोला का टीका, ट्रायल शुरू हुआ
कांगो के इतूरी प्रांत में इबोला वायरस के प्रकोप के बीच वैज्ञानिकों ने पहले क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे 'सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित किए जाने के महज छह सप्ताह बाद, मरीजों को दो नई दवाओं—रेमडेसिविर और एमबीपी134—का परीक्षण दिया जा रहा है।

कांगो, एजेंसी। कांगो के इतूरी प्रांत में फैले घातक इबोला वायरस के प्रकोप के बीच वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड तोड़ सफलता हासिल की है। इस बीमारी के इलाज के लिए इतिहास में सबसे तेजी से कदम उठाते हुए वैज्ञानिकों ने पहला क्लिनिकल ट्रायल शुरू कर दिया है, जिसमें मरीजों को भर्ती कर दवाएं देना शुरू किया जा चुका है। 17 मई 2026 को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित करने के महज छह हफ्ते के भीतर यह ट्रायल शुरू हुआ है। इलाज के लिए कोई स्वीकृत दवा नहींफिलहाल इबोला के 'बुंडिबुग्यो' स्ट्रेन का कोई स्वीकृत टीका या प्रामाणिक इलाज मौजूद नहीं है।
यह स्ट्रेन हर तीन में से एक मरीज की जान ले लेता है। 9 जुलाई 2026 तक इसके 1792 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं और 625 लोगों की मौत हो चुकी है।दो दवाओं का हो रहा है परीक्षणट्रायल के तहत दो मुख्य दवाओं का परीक्षण किया जा रहा है, रेमडेसिविर और एमबीपी134 (एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी)। पशु मॉडल में ये दवाएं बेहद प्रभावी साबित हुई हैं, और अब इंसानों पर इनके जरिए मृत्यु दर को कम करने का परीक्षण किया जा रहा है।


