अब भी दिल दिमाग में आपातकाल का सायरन गूंजता है
25 जून 1975 को लगा था आपातकाल, लोगों की आजादी छीनी थी आपातकाल के बाद

भागलपुर, प्रधान संवाददाता। जेपी आंदोलन के अगुवा रहे प्रकाश चन्द्र गुप्ता 25 जून 1975 की आधी रात के बाद घटनाक्रम को याद कर आज भी इंकलाबी दिखते हैं। कहते हैं यह रात भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे काली रात थी। देश में इमरजेंसी लगाकर नागरिक अधिकारियों से वंचित कर दिया गया था। सायरन की आवाज गूंजती थी। वह उस रात जयप्रकाश नारायण के निर्देश पर मधुबनी में सौराठ सभा के लिए पहुंचे थे। लेकिन इमरजेंसी लगने के कुछ ही देर बाद आंदोलन से जुड़े लोगों के ठिकाने पर छापा पड़ा। उनके करीब 20 साथी गिरफ्तार कर लिए गए। भागलपुर निवासी जेपी की भांजी और प्रकाश गिरफ्तारी से बचकर भागलपुर पहुंचे और यहां आंदोलन धधक पड़ा। प्रकाश इस आंदोलन में छात्र संघर्ष समिति के संयोजक थे। मौजूदा एमएलसी ललन सर्राफ टाउन कमेटी के संयोजक थे। मौजूदा केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह भी इस कमेटी में थे। प्रकाश बताते हैं कि भागलपुर इमरजेंसी की आग में ऐसा सुलगा कि 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का खूंटा उखड़ गया। जनता पार्टी के उम्मीदवार और जेपी सेनानी डॉ. रामजी सिंह बिना धन बल और प्रचार के जीते। इसके बाद विधानसभा चुनाव में भी जेपी सेनानी विजय कुमार मित्रा विधायक बने। हालांकि इस आंदोलन में कई लोग जुड़े थे जो बाद में राजीतिक जीवन में भी आए। पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष हरिवंश मणि सिंह, मो.शमीम, हीरा पाण्डेय, अशोक घोष, शैलेश भारती आदि प्रमुख नाम हैं।
नीतीश कुमार के साथ 18 महीने केन्द्रीय कारा में रहे
इमरजेंसी में मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्युरिटी एक्ट) और डीआईआर (डिफेंस इंडिया रुल) के तहत कई आंदोलनकारियों को भागलपुर जेल में भर दिया गया था। इसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी थे। प्रकाश बताते हैं नीतीश जी साथ थे और उनकी पत्नी सहित परिवार के लोग जेल में मिलने आते थे।
जिसने गिरफ्तार लोगों को प्रणाम किया उसकी भी गिरफ्तारी
प्रकाश बताते हैं कि मधुबनी से बचकर निकलने के बाद अगस्त में ही शहर के एक व्यावसायी के घर से पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद थाने ले जाने के दौरान रास्ते में अगर किसी ने प्रणाम भी किया तो उसको भी गिरफ्तार कर लिया गया। यह वैसा समय था जब नागरिकों के अधिकार छीन लिए गए थे। लोग घरों से कम निकल रहे थे। पुलिस जिसे चाहती थी उसे पकड़ लेती थी।
नीतीश सहित कई साथियों ने सक्रिय राजनीति में आने को कहा
प्रकाश चन्द्र गुप्ता कहते है कि वह जेपी के विचारों से प्रभावित होकर आंदोलन से जुड़े थे। वह किसी राजनीतिक दल से कभी नहीं जुड़े। आंदोलन जिन मांगों के लिए किया जा रहा था वह नागरिकों और मतदाताओं का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने बताया कि बाद के दिनों में नीतीश कुमार, ललन सर्राफ सहित कई नेताओं ने सक्रिय राजनीति में आने को कहा। लेकिन मेरी कभी रुचि नहीं रही।


