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मुन्नाभाई केस : 5 महीने से एम्स में घूमने वाला फर्जी डॉक्टर ऐसे आया पकड़ में

khurram in aiims

करीब 5 माह तक डॉक्टर बनकर लोगों में रौब गांठने वाला 19 साल का अदनान खुर्रम का जिस तरह से पर्दा फाश हुआ उससे सनसनी फैल गई है। पुलिस ने बताया कि आरोपी युवक दिल्ली के एम्स में सिर्फ डॉक्टर बनकर नहीं घूम रहा था बल्कि अस्पताल के हर उस कार्यक्रम में शामिल होता था जो सिर्फ डॉक्टरों के लिए होते थे। यहां तक की कि अदनान डॅाक्टरों की ओर से आयोजित नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल के खिलाफ प्रदर्शन में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। 


एम्स के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हरजीत सिंह भट्टी ने बताया,  'मैं पहली बार उससे तब मिला जब हम दिसंबर में एनएमसी बिल के खिलाफ प्रदर्शन करने की योजना बना रहे थे। वह सभी मीटिंग्स में बहुत ही सक्रिय रहता था। हमने उसका स्वागत किया क्योंकि ज्यादातर छात्र यहां पढ़ाई से ऊबने के बाद हमारे के साथ प्रदर्शन के लिए आ रहे थे।

अदनान खुर्रम एक ऐसा शख्स जो डॉक्टरों की हर मीटिंग और प्रदर्शन में हिस्सा लिया करता था। आरडीए की ओर से आयोजित एक मैराथन में भी खुर्रम में हिस्सा लिया था। इतना ही नहीं वह एम्स में आने वाले वीआईपी लोगों से मिलने के लिए आरडीए के फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल भी किया करता था।

 

राहुल गांधी और लालू प्रसाद यादव से भी मिला-

आरडीए के इन्हीं फर्जी परिचय पत्रों का इस्तेमाल वह एम्स में आने वाले वीआईपी लोगों से मिलने के लिए भी करता था। अपने इसी ट्रिक का इस्तेमाल करते हुए खुर्रम जबरन राहुल गांधी से भी मिला। यहां लालू प्रसाद यादव जब इलाज के लिए आए तो वह उनसे भी मिला।

लेकिन जब वह हर मीटिंग में डॉक्टरों को मिलने लगा और अस्पताल में रोजाना 18-20 घंटे दिखने लगा तो डॉक्टरों को उस पर संदेह हुआ। वह हर शाम कॉफी शॉप में डॉक्टरों से मिलता और उनसे बातें करता। डॉक्टरों के हॉस्टल के पास उनसे मिलता। वह खुद को जूनियर रेजिडेंट बताता। लेकिन उसके पास इतना ज्यादा टाइम है यह जानकर सभी हैरान होते।

डॉक्टर भट्टी ने बताया कि एम्स में करीब 2000 डॉक्टर हैं। यहां हर साल जनवरी और जुलाई में नए डॉक्टरों का बैच आता ऐसे में एक दूसरे को पहचानना और उनसे दोबारा मिलना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में यह पता नहीं चल पा रहा था कि आरोपी अदनान किस बैच का है? किस डिपार्टमेंट का है और कौन सा कोर्स कर रहा है।

 

आरोपी जब शक हुआ तो सभी डिपार्टमेंट्स का रिकॉर्ड चेक किया गया कि वह एमबीबीएस, एमडी या डीएम कौन सा कोर्स कर रहा है। जब उसका नाम किसी डिपार्टमेंट में नहीं मिला तो आरडीए ने एम्स के फाइनेंस डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड चेक कि शायद यहां से किसी को जूनियर डॉक्टर के रूप में स्टाइपेंड पर न रख लिया गया हो। लेकिन यहां भी कुछ नहीं मिला।

इसके बाद खुर्रम को कई बार बुलाया गया लेकिन वह नहीं आया। तो आरडीए ने एम्स के सिक्यूरिटी ऑफिसर्स को एलर्ट कर दिया कि ऐसा कोई लड़का दोबारा दिखता है तो उस पर कड़ी नजर रखी जाए। इसके बाद संडे को आयोजित मैराथन में जब खुर्रम दोबारा डॉक्टरों के बीच पहुंचा तो चुपचाप पुलिस को सूचित किया गया और उसे गिरफतार करा दिया गया।

हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि खुर्रम न तो कोई क्लास अटेंड करता था और न किसी मरीज का इलाज करता था क्योंकि एम्स में उसका कहीं भी नाम नहीं था। फिर भी सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला था।

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  • Web Title:read how 19 yearl old munna bhai who impersonated AIIMS doctor was finally caught