रथ पर सवार होंगे जगन्नाथ, बेंत रूप में पूजनीय होंगी मां मनसा
रथयात्रा के दिन चंपानगरी में एक अद्भुत आध्यात्मिक संगम होगा इस दिन मां मनसा

नाथनगर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि । इस वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर एक अद्भुत और दुर्लभ आध्यात्मिक संयोग बन रहा है। साहित्यकार आलोक कुमार और मंजूषा के वरिष्ठ कलाकार हेमंत कुमार ने संयुक्त रूप से बताया कि एक ओर जहां भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा आरंभ होगी, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक चंपानगरी में मां मनसा विषहरी की प्रथम पूजा विशेष धूप-दीप के साथ संपन्न की जाएगी। इस दिन की सबसे विलक्षण परंपरा यह होगी कि मां मनसा का पवित्र पिंड पूरी तरह कलश से रिक्त रहेगा। कलश के स्थान पर केवल पवित्र बेंत की स्थापना कर विशेष धूप-दीप, मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना की जाएगी।
इसके साथ ही बारी कलश का भी विशेष पूजन होगा। यह परंपरा अगले दिन कर्क संक्रांति पर होने वाली मुख्य कलश-स्थापना की पूर्व पीठिका मानी जाती है। उन्होंने आगे बताया कि इस पावन दिन भगवान जगन्नाथ अपने रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे, तो दूसरी तरफ चंपानगरी में मां मनसा विषहरी का पवित्र आसन कलश-विहीन होकर बेंत स्वरूप में पूजित होगा। यह अलौकिक दृश्य श्रद्धा, प्रतीक्षा, तप और दिव्य आराधना का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा। ऐसा दिव्य संयोग सदियों में कभी कभार ही देखने को मिलता है।


