कोसी-रामगंगा के 12 संवेदनशील गांवों पर नजर
रामपुर प्रशासन मानसून और पहाड़ों पर अतिवृष्टि के बीच बाढ़ सुरक्षा के लिए पूरी तरह सजग है। जिले की प्रमुख नदियों का जलस्तर सामान्य है, लेकिन एहतियात के तौर पर राहत चौपालें आयोजित की जा रही हैं। 30 बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं और ग्रामीणों की जागरूकता के लिए सचेत ऐप डाउनलोड कराया जा रहा है।

रामपुर। मानसून और पहाड़ों पर हो रही अतिवृष्टि के बीच जनपद में बाढ़ सुरक्षा, राहत-बचाव और जन-जागरूकता को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। वर्तमान में जिले की प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से औसतन डेढ़ से दो मीटर नीचे बह रहा है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत गांव-गांव राहत चौपालें आयोजित कर ग्रामीणों को सचेत ऐप डाउनलोड कराया जा रहा है और कंट्रोल रूम के जरिए सीधे ग्राम प्रधानों से संपर्क साधा जा रहा है। रामपुर के जिला आपदा विशेषज्ञ दीपक पाल के अनुसार जिला प्रदेश के 44 अतिसंवेदनशील बाढ़ जिलों में शामिल नहीं है, फिर भी एहतियात के तौर पर पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
कोसी और रामगंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने पर निचले कृषि क्षेत्रों में पानी फैलने की आशंका रहती है, जिसके मद्देनजर 12 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है। जिले में 30 बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं और राहत व बचाव कार्यों से जुड़े सभी पांच प्रकार के टेंडर पूरे कर लिए गए हैं। रामनगर बैराज और रामगंगा डैम के कंट्रोल रूम से लगातार समन्वय स्थापित है और उनके ग्रुपों से रियल टाइम जलस्तर का डेटा लिया जा रहा है। जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी स्वयं संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। सचेत ऐप और आपदा मित्रों की ट्रेनिंग के जरिए ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट किया जा रहा है, जबकि वर्तमान में नदियों का जलस्तर खतरे के पैमाने से काफी नीचे बना हुआ है।


