माता पिता की सेवा बच्चों का कर्तव्य: डॉ कमल किशोर

हिन्दुस्तान, देहरादून
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देहरादून में श्री श्याम सुंदर मंदिर के 43वें वार्षिक उत्सव पर राम कथा के छठे दिन, कथा वाचक डॉ. कमल किशोर ने माता-पिता की सेवा को बच्चों का कर्तव्य बताया। उन्होंने भगवान श्री राम के वनवास का प्रसंग सुनाते हुए त्याग और आज्ञा पालन की महत्ता पर बल दिया।

माता पिता की सेवा बच्चों का कर्तव्य: डॉ कमल किशोर

देहरादून। श्री श्याम सुंदर मन्दिर पटेल नगर के 43 वे वार्षिक उत्सव पर आयोजित श्री राम कथा के छठे दिन कथा व्यास डॉ कमल किशोर ने श्री राम वनवास प्रसंग सुनाते हुए कहा माता पिता देव तुल्य है, उनकी आज्ञा मानना और सेवा करना बच्चों का प्रथम कर्तव्य है। उन्होंने कहा भगवान श्री राम ने पिता दशरथ की आज्ञा को सर्वोच्च मानते हुए अपने राज तिलक की घोषणा के बावजूद 14 वर्ष तक वनवास चले गये। उन्होंने कहा त्याग आज्ञा पालक और मर्यादा का सर्वोच्च उदाहरण है राम वनवास। उन्होंने कहा श्री राम ने केवट को गले लगाकर यह संदेश दिया कि सब समान है।

Shailendra Semwal

लेखक के बारे में

Shailendra Semwal

शॉर्ट बायो : शैलेन्द्र सेमवाल पिछले 28 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में दैनिक हिन्दुस्तान देहरादून में सीनियर कंटेंट क्रिएटर के रुप में कार्यरत हैं।


परिचय एवं अनुभव:

पिछले 28 सालों के सफर में शैलेन्द्र सेमवाल ने प्रिंट मीडिया क्षेत्र में विविध विषयों वाले आलेख लिखे हैं। 2008 से वह हिन्दुस्तान के मसूरी सेंटर के प्रभारी रहे। उनके विषयों में इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, शोधात्मक, विश्लेणात्मक, लाइफ स्टाइल, फैशन, फिल्म वर्ल्ड और घटनात्मक खबरें रही हैं। एक फीचर कंटेंट राइटर के रुप में उन्होंने समग्र विषयों पर लिखा है। इतिहास, आंचलिक विषयों और मुद्दों पर उनका गहन अध्ययन है।


कॅरियर का सफर

शैलेन्द्र सेमवाल ने अपने प्रिंट लेखन की शुरूआत अपने स्टडी के दौरान ही कर ली थी। 2003 में अमर उजाला देहरादून में बतौर ट्रेनी कॅरियर शुरू किया। 2004 में विकासनगर और मसूरी अमर उजाला के बतौर ब्यूरो प्रमुख काम किया। वह शिमला, पौड़ी जैसी जगहों पर अमर उजाला, जागरण और हिन्दुस्तान के लिए लिख चुके हैं। इसके अलावा अन्य प्रमुख पत्रिकाओं में भी उनका लेखन चल रहा था। 2008 में उत्तराखंड में हिन्दुस्तान लांच होने के बाद से वह हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं। 2010 से देहरादून में कार्यरत हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि:

शैलेन्द्र सेमवाल ने सन 2000 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि से एमएससी जूलोजी करने के बाद बीजे और एमजेएमसी की डिग्री हासिल की। साहित्य रंगकर्म से जुड़ाव से उनका रुझान पत्रकारिता की ओर हुआ। साहित्य, संस्कृति, मनोरंजन, इतिहास, विज्ञान जैसी बीट पर कमांड है। उनकी शोध परक अनेक लेख ऑल एडिशन, फ्रंट पेज पर प्रकाशित होते रहे हैं।


एंटरटेनमेंट और विजन

कॅरियर में आर्ट, कल्चर, एंटरटेनमेंट, राज्य की राजनीति से जुड़े विषयों पर कई सेलिब्रिटी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू का अवसर मिला। शैलेन्द्र सेमवाल का मानना है कि पत्रकारिता में विषयों की बुनियादी समझ होना जरुरी है। लगातार गहराई से जानने की जिज्ञासा रखना ही सार्थक पत्रकारिता महत्वपूर्ण अंग है।


विशेषज्ञता:

बॉलीवुड, उत्तराखंडी फिल्म संगीत, लोककला, नृत्य, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, किसी भी सेलिब्रिटी का उत्तराखंड कनेक्शन तलाशना, हिमालयी पर्यावरण, पारिस्थितिकी, सामाजिक मुद्दे, पर्यावरणीय आंदोलन, राज्य आंदोलन, राज्य का इतिहास, खोजपरक स्टोरी।

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