चार पहिया ईवी की खरीद पर दी जाए सब्सिडी
नई दिल्ली, राज्यसभा की उद्योग संबंधी स्थायी समिति ने इलेक्ट्रिक कारों के लिए समयबद्ध उपभोक्ता सब्सिडी की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि मौजूदा कीमतों के कारण आम उपभोक्ता इलेक्ट्रिक कार नहीं खरीद पा रहे हैं। सरकार को प्रोत्साहन के साथ सामान्य ग्राहकों को भी राहत देने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। राज्यसभा की उद्योग संबंधी स्थायी समिति ने चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लक्षित और समयबद्ध उपभोक्ता सब्सिडी शुरू करने सिफारिश की है। समिति ने माना है कि इलेक्ट्रिक कारों की शुरुआती कीमत अब भी आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी बाधा है। मौजूदा समय में डीजल-पेट्रोल कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक कारों की शुरुआती कीमत काफी अधिक है। बीते दिनों में समिति द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया कि इलेक्ट्रिक कारें पीएम ई-ड्राइव योजना में सीधे उपभोक्ता सब्सिडी के लिए शामिल नहीं हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक कारों की शुरुआती कीमत अधिक होना आम आदमी को इलेक्ट्रिक कार खरीदने से रोकने की बड़ी वजह है। मौजूदा समय में सरकार द्वारा संचालित उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन (पीएलआई)-ऑटो जैसी उत्पादन आधारित योजनाएं कंपनियों और निर्माताओं को प्रोत्साहन देती है, लेकिन इसका सीधा लाभ आम कार खरीदने वाले ग्राहकों को नहीं मिल रहा है। समिति ने कहा कि कारों पर कोई सब्सिडी या प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है तो इलेक्ट्रिक कारों को बड़े पैमाने पर अपनाने की रफ्तार धीमी रह सकती है। खासकर इसका असर मध्य वर्ग और निजी कार खरीदारों पर पड़ सकता है, क्योंकि इलेक्ट्रिक कार की खरीद में कीमतों का अंतर ग्राहक के फैसले को प्रभावित कर सकता है।
पीएलआई का असर जांचने की भी जरूरत
समिति ने सरकार के सामने पीएलआई-ऑटो के तहत कंपनियों को दिए जा रहे उत्पादन आधारित प्रोत्साहन का वास्तविक फायदा ग्राहकों तक पहुंच रहा है या नहीं, उसके लिए समय-समय पर आकलन करने की सिफारिश की। समिति ने कहा कि आकलन किया जाए कि इलेक्ट्रिक वाहनों की खुदरा कीमत वास्तव में कम हुई या नहीं। साथ ही, देखा जाए कि आम ग्राहक के लिए इलेक्ट्रिक कार खरीदना कितना सुलभ हुआ। इस सिफारिश के जवाब में मंत्रालय ने समिति को बताया कि पीएलआई योजना के तहत चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों को समर्थन मिला है। इस तरह से देश में इलेक्ट्रिक कारों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एसपीएमईसीई योजना भी लागू की जा रही है। इसके जवाब पर समिति संतुष्ट नहीं हुई।
ग्राहकों को सीमित अवधि के लिए दें राहत
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन देने के साथ कार खरीदने वाले आम ग्राहक को भी सीधे और सीमित अवधि के लिए आर्थिक राहत दे। इससे इलेक्ट्रिक कार और पेट्रोल-डीजल कार की शुरुआती कीमत का अंतर कम होगा और ईवी की बिक्री तेजी से बढ़ेगी। समिति ने यह सिफारिश केवल पर्यावरण के लिए नहीं है। देश का तेल आयात कम करने, ऊर्जा सुरक्षा और वाहन प्रदूषण घटाने की संभावनाओं को भी जोड़ा है।
बैटरी क्षमता और कीमत के आधार पर मिले प्रोत्साहन
समिति ने मंत्रालय से इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों के लिए एक व्यापक नीति तैयार करने की अपनी सिफारिश दोहराई है। समिति ने कहा है कि इस नीति में मांग आधारित प्रोत्साहन यानी सीधे उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी की व्यवस्था होनी चाहिए। सब्सिडी तय करने के लिए बैटरी की क्षमता, वाहन की ऊर्जा दक्षता और वाहन की कीमत जैसी वस्तुनिष्ठ कसौटियां निर्धारित की जा सकती हैं। समिति ने मंत्रालय से इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखने और अपनी सिफारिशों पर की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है।
-----------
समिति की अन्य सुझाव व चिंताएं
- समिति ने पीएलआई-ऑटो योजना में बजट अनुमान और वास्तविक खर्च के बीच बड़े अंतर पर चिंता जताई है।
- जीरो एमिशन व्हीकल श्रेणी में निवेश, बिक्री, रोजगार और घरेलू मूल्यवर्धन की नियमित निगरानी की जाए।
- सरकार इलेक्ट्रिक यात्री कार निर्माण को बढ़ावा देने वाली एसपीएमईसीआई योजना की भी समीक्षा करे।
- पीएम ई-ड्राइव के तहत ईवी सब्सिडी के भुगतान में देरी को लेकर भी समिति ने चिंता जताई।


