'इलाज में एआई अपनाएं, पर हीलिंग टच न भूलें'; राजनाथ सिंह बोले- मशीन नहीं समझ सकती मरीज के मन की पीड़ा
केजीएमयू दीक्षांत समारोह में राजनाथ सिंह की डॉक्टरों को सलाह- इलाज में एआई अपनाएं, व्यवहार में रखें हीलिंग टच।
रजनीश रस्तोगी, वरिष्ठ संवाददाता। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने डॉक्टरों को इलाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी, लेकिन साथ ही साफ कहा कि तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, वह मरीज के मन की पीड़ा और भावनाओं को नहीं समझ सकती। मरीज को स्नेह और अपनापन सिर्फ डॉक्टर ही दे सकता है, इसलिए दवा के साथ-साथ व्यवहार में भी हीलिंग टच होना चाहिए। रक्षामंत्री सोमवार को केजीएमयू के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि डॉक्टर की पहचान केवल उसके ज्ञान से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से होती है। मरीज डॉक्टर के ज्ञान पर भरोसा करता है, लेकिन उसके स्नेह, आत्मीयता और अपनेपन को जीवनभर याद रखता है। रक्षामंत्री ने कहा कि कई मरीज डॉक्टरों को सफेद कोट में देखकर ही घबरा जाते हैं, जिसे व्हाइट कोट सिंड्रोम कहा जाता है। इस सोच को बदलने की जरूरत है।
गरीबों का सहारा सिर्फ डॉक्टर, समान भाव से करें इलाज
राजनाथ सिंह ने डॉक्टरों से सेवा का संकल्प लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संपन्न लोगों के पास इलाज के कई विकल्प होते हैं, लेकिन गरीब और कमजोर वर्ग डॉक्टरों पर ही निर्भर रहता है। ऐसे में सभी मरीजों का समान भाव से इलाज करना ही डॉक्टर का सबसे बड़ा धर्म और मानवता की सच्ची सेवा है। उन्होंने सलाह दी कि डॉक्टर धैर्यपूर्वक मरीज की पूरी बात सुनें, क्योंकि कई बार बीमारी का सही निदान मरीज की बातों में ही छिपा होता है।
डॉक्टर अपनी सेहत का भी रखें ध्यान
रक्षामंत्री ने कहा कि डॉक्टरों को अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए और योग-ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का मकसद केवल इलाज नहीं, बल्कि बीमारी की रोकथाम भी होना चाहिए।
अंगदान के लिए प्रेरित करें, आधुनिक तकनीक अपनाएं
उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य पर अधिक शोध करने, अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने और ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। रक्षामंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना और जन औषधि केंद्रों ने गरीबों को बड़ी राहत दी है। भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। ब्रेस्ट कैंसर के लिए नैनो ड्रग, जीन थेरेपी और कार-टी सेल थेरेपी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर देश में तेजी से काम हो रहा है。
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