संबोधन: आरएसएस समाज की सेवा में फिर भी लोगों में गलतफहमियां: राजनाथ

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) 100 वर्षों से देश और समाज की सेवा कर रहा है। उन्होंने कहा कि आरएसएस को समझना कठिन है और गलत समझना आसान है। उन्हें विश्वास है कि 'द ब्रदरहुड सैफरॉन' पुस्तक इस परिभाषा को स्पष्ट करेगी। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरएसएस की पंजीकरण की आवश्यकता को नकारा।

संबोधन: आरएसएस समाज की सेवा में फिर भी लोगों में गलतफहमियां: राजनाथ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) 100 वर्षों से लगातार देश और समाज की सेवा कर रहा। इसके बावजूद समाज का एक बड़ा वर्ग संगठन के बारे में या तो जानकारी के अभाव में है या फिर भ्रामक धारणाओं का शिकार है। शुक्रवार को उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बात कही।

आरएसएस का योगदान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आरएसएस 100 वर्षों से देश और समाज की सेवा में लगा है। इसके बावजूद समाज के एक वर्ग के पास गलत जानकारी है। उन्होंने कहा, अमेरिकी विद्वानों वाल्टर एंडरसन और श्रीधर डी दामले ने अपनी किताब ‘द ब्रदरहुड सैफरॉन’ में लिखा है कि आरएसएस को समझना कठिन है और गलत समझना आसान। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि यह पुस्तक उस कमी को काफी हद तक दूर करेगी।

आंदोलन में भागीदारी

रक्षा मंत्री ने उन आरोपों को खारिज किया कि स्वतंत्रता आंदोलन में आरएसएस की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि वर्षों से ऐसा नैरेटिव फैलाया गया, जबकि संगठन ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में सक्रिय भागीदारी निभाई थी। उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसा मानते हैं, उन्हें इस पुस्तक का चौथा अध्याय पढ़ना चाहिए। इसमें बताया गया है कि आरएसएस के स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की थी। स्वयं डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल गए थे। भारत छोड़ो आंदोलन के समय आरएसएस स्वयंसेवकों ने कई क्रांतिकारियों को अपने घरों में शरण भी दी थी।

कांग्रेस पर साधा निशाना

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि हाल में एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया था कि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन क्यों नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे सवालों का जवाब देना भी जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि मां के प्रेम के लिए किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। शिक्षक के संस्कार किसी सरकारी मुहर पर निर्भर नहीं होते। गंगा को बहने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती और सूर्य को प्रकाश देने के लिए पंजीकरण की जरूरत नहीं होती। इसी तरह आरएसएस एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है जिसे किसी प्रमाणपत्र या सरकारी मान्यता की आवश्यकता नहीं है।

सामान्य प्रश्न

आरएसएस ने स्वतंत्रता आंदोलन में कैसे भाग लिया?
आरएसएस के स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की थी। स्वयं डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल गए थे।

इस खबर पर आपकी क्या राय है?

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से जुड़ी नवीनतम खबरों और पल-पल की जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।