Rajasthan congress president Sachin Pilot interview with hindustan - इंटरव्यू: सचिन पायलट बोले- राजस्थान में भाजपा की गाड़ी पटरी से उतर चुकी DA Image
18 नबम्बर, 2019|9:34|IST

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इंटरव्यू: सचिन पायलट बोले- राजस्थान में भाजपा की गाड़ी पटरी से उतर चुकी

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सचिन पायलट।

कांग्रेस के युवा नेता और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सचिन पायलट राज्य के साथ-साथ केंद्रीय राजनीति में भी काफी सक्रिय रहते हैं। वह मानते हैं कि इस साल राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव से कांग्रेस के लिए दिल्ली की सत्ता में आने का रास्ता तैयार होगा। राजस्थान चुनाव और उसके बाद आम चुनाव की तैयारियों से जुड़े मुद्दों पर उनसे विस्तृत बातचीत की हिन्दुस्तान के ब्यूरो प्रमुख मदन जैड़ा ने। पेश हैं प्रमुख अंश-

-राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों को 2019 के आम चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है, क्या तैयारियां हैं?
चुनाव की तैयारी तो हर पार्टी करती है। लेकिन दिसंबर 2013 में जब हम राजस्थान में विधानसभा चुनाव हारे, तो उसके तुरंत बाद से ही हमने तैयारियां शुरू कर दी थीं। इसी दौरान पार्टी ने मुझे राज्य की कमान सौंपी। हमने शुरू से ही जनता से जुड़े मुद्दों को विधानसभा के भीतर और बाहर उठाना शुरू किया और गलतियों के लिए वसुंधरा सरकार को कठघरे में खड़ा करना भी शुरू किया। हाल में हमने ‘मेरा बूथ मेरा गौरव’ कार्यक्रम शुरू करके जमीनी स्तर पर नेटवर्क तैयार किया है, जिसमें कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय किया गया है। आईटी नेटवर्क से जोड़ा गया है। हमारी तैयारियां पूरी हैं और हम बहुमत से राजस्थान में सरकार बनाएंगे। 
    
-लोकसभा चुनावों में पिछली बार राजस्थान से एक भी सीट कांग्रेस को नहीं मिली थी, इस बार आप कितनी सीटों की उम्मीद कर रहे हैं?
राजस्थान का चुनाव इतिहास देखिए। वहां जो पार्टी राज्य की सत्ता में आती है, वही लोकसभा चुनाव भी जीतती है। पिछली बार भाजपा सत्ता में आई, तो लोकसभा चुनाव में उसे 25 सीटें मिली। उससे पहले हम सत्ता में थे, तो हमें 20 सीटें मिली थीं। उससे पहले भाजपा को। यह दोहराव इस बार भी होगा। पहले राज्य में सरकार बनाएंगे और फिर लोकसभा की सभी सीटें जीतेंगे। वैसे भी पिछले चुनाव में भाजपा की वह जीत लहर की वजह से हुई थी। जो सांसद जीतकर आए थे, उनकी स्थिति जमीनी स्तर पर ठीक नहीं है, इसलिए हमारी जीत पक्की है।

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-कहा जा रहा है कि वहां कांग्रेस को ज्यादा फायदा वसुंधरा सरकार के अंतर्विरोधों की वजह से हो रहा है?
यह बात सही है कि केंद्रीय नेतृत्व और राज्य नेतृत्व के बीच खींचतान है। अभी प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में भी सबने देखा। 75 दिन लग गए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष तय करने में। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व अपनी पसंद के व्यक्ति को नियुक्त नहीं कर पाया। केंद्र और राज्य में अनबन का फायदा भी हमें मिलेगा। 

-इसका मतलब यह हुआ कि डबल इंजन की सरकार का फायदा राजस्थान की जनता को नहीं मिल पाया?
फायदा मिलना तो दूर, उल्टा हो गया। जिस प्रकार गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि को केंद्र ने भरपूर मदद दी और चुनाव को ध्यान में रखकर वहां योजनाएं चलाईं, वैसी पहल राजस्थान के लिए नहीं हो सकी। राजस्थान की जनता आज पूछ रही है कि हमने विधानसभा में भारी बहुमत से आपको जिताया। लोकसभा चुनाव में 25 में से 25 सीटें दीं, लेकिन आपने राज्य का कोई विकास नहीं किया, जबकि दोनों जगह आपकी सरकार है। इसलिए अब राजस्थान में भाजपा की गाड़ी पटरी से उतर चुकी है। 

-राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में क्या-क्या बदलाव आए हैं?
नई कार्यकारणी बनी है। प्रदेशों के प्रभारी बदले गए हैं और बदले जा रहे हैं। बदलाव एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसे राहुल गांधी अंजाम दे रहे हैं। पार्टी में नए लोगों को मौका दिया जा रहा है। यह बदलाव अच्छे के लिए हो रहा है। इसके सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे।

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-पार्टी के तेवर और उसकी कार्यशैली में आप कितना परिवर्तन देखते हैं?
पार्टी का रुख आक्रामक हुआ है। राहुल गांधी सरकार की जिम्मेदारी तय करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने रोजगार, किसानों के मुद्दे, अर्थव्यवस्था आदि मसलों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। वह आक्रामक और निडर होकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि विपक्ष को सरकार एजेंसियों का इस्तेमाल कर डरा रही है। इससे पार्टी में उत्साह है और वह मुकाबला करने लगी है। 

-लेकिन कांग्रेस केंद्र की विफलताओं को लेकर कोई देशव्यापी आंदोलन क्यों नहीं कर पा रही?
मैं मानता हूं कि जिस बहुमत के साथ भाजपा सरकार बनी थी, शुरुआती दौर में सबको उम्मीद थी कि यह सरकार काम करेगी। लेकिन लोगों को अब पता चल गया है कि स्थितियां पहले से भी खराब हो गईं। कांग्रेस ने राज्यों में स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच काम किया है। राजस्थान में ही हमने किसानों, बिजली के दामों, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर काम किया है। जहां तक राष्ट्रीय स्तर की बात है, तो केंद्र सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव लाने के लिए आठ बार अध्यादेश निकाला। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष को साथ लेकर इसका विरोध किया गया। लोकसभा में तब हमारे 44 सांसद थे, पर हमने सरकार के इस प्रयास को नाकाम कर दिखाया। इसी प्रकार, कसानों की आय दोगुनी करने, नोटबंदी की विफलता, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और जीएसटी से अर्थव्यवस्था को होने वाली क्षति को लेकर भी हम लोगों को जागरूक करने में कामयाब रहे हैं। 

-सरकार ने एमएसपी को लागत का डेढ़ गुना किया है। कहा जा रहा है कि जैसे यूपीए-2 बनने में मनरेगा की भूमिका रही, वैसी ही भूमिका एमएसपी निभाएगा?
मुझे नहीं लगता। पहली बात तो यह कि जो एमएसपी तय किया गया है, वह किसानों की वास्तविक लागत का आकलन करके नहीं किया गया है। इसमें जमीनी इनपुट नहीं हैं, बल्कि दिल्ली में बैठे बाबुओं ने इसे तय किया है। दूसरी, एमएसपी तय करना उतनी बड़ी बात नहीं है, जितनी कि किसानों को एमएसपी मिलना। सच्चाई यह है कि जो एमएसपी तय होता है, वह किसानों को मिलता ही नहीं है। किसान औने-पौने दामों में अपनी उपज दलालों को बेचने को मजबूर होते हैं। सरकारी एजेंसियां ज्यादा खरीद नहीं कर पाती हैं। इसलिए असली बात यह है कि एमएसपी किसानों को मिलना सुनिश्चित हो। एक प्रश्न और भी है कि चार साल तक सरकार एमएसपी के मुद्दे पर चुप क्यों रही? अब जब चुनाव निकट हैं, तभी क्यों घोषित कर रही है? यदि सरकार वाकई किसानों का हित चाहती, तो पहले घोषित करती। सही बात तो यह है कि राहुलजी ने किसानों के मुद्दे पर संसद में सरकार को लगातार कठघरे में खड़ा किया, उसे सूट-बूट की सरकार कहा, तब सरकार जागी है। 

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-आम चुनावों के लिए कांग्रेस के पास बड़े मुद्दे क्या हैं?
सबसे बड़ा मुद्दा तो बेरोजगारी का है। दो करोड़ रोजगार हर साल देने की बात कही थी, लेकिन कितने रोजगार मिले यह सब जानते हैं। किसानों की बदहाली दूसरा बड़ा मुद्दा है। महंगाई की समस्या बढ़ी है। चीन और पाकिस्तान आंखें दिखा रहे हैं। जब वे विपक्ष में थे, तब कहते थे कि एक सिर कटेगा, तो दस ले आएंगे। अब क्या हुआ? रोज सीमा पर सैनिक मारे जा रहे हैं। सरकार उनकी रक्षा नहीं कर पा रही है। जब वाजपेयीजी पीएम थे, तब सोनिया गांधी ने सदन में कहा था कि आप भाजपा के नहीं, देश के प्रधानमंत्री हैं। आप पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दें। हम आपके साथ हैं। आज पीएम को कौन रोकता है पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए? भाजपा इन विफलताओं से डरी हुई है, इसलिए वह भावनात्मक मुद्दों को हवा दे रही है। वह हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहती है, ताकि असल मुद्दे दूर रहें। 

-कांग्रेस कभी हिंदुत्व का डर दिखाती है, तो कभी मुसलमानों की पार्टी होने की बात कहती है, यह कन्फ्यूजन क्यों है?
कोई कन्फ्यूजन नहीं है। हम यह मानते हैं कि राजनीति और धर्म अलग होने चाहिए। भाजपा अपनी विफलताओं पर परदा डालकर धार्मिक मुद्दों को हवा दे रही है। मगर काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती। देश सबका है और कांग्रेस न किसी धर्म की है और न किसी जाति की, यह पूरे देश की पार्टी है। इसी प्रकार, राष्ट्रवाद या हिंदू धर्म का ठेका किसी एक पार्टी के पास नहीं है। मैं पूजा-पाठ करता हूं, मगर यह मेरा निजी मसला है, इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। और न ही इसके लिए किसी के सार्टिफिकेट की जरूरत है। यदि भारतीय जनता पार्टी को अपने काम पर भरोसा है, तो वह धार्मिक मुद्दों को अपनी चुनावी बैसाखी नहीं बनाए।

-आम चुनावों में गठबंधन की राजनीति को किस नजरिये से देखते हैं?
आज देश यह जरूरत महसूस कर रहा है कि एनडीए सरकार का एक बेहतर विकल्प हो। कई दल एनडीए के साथ थे, वे उसकी अहंकार भरी राजनीति को छोड़कर अलग हो रहे हैं। जहां तक कांग्रेस का सवाल है, तो हमारा गठबंधन पहले से बना हुआ है। यूपीए में कई दल हैं। जो और आना चाहेंगे, उनका भी स्वागत होगा। साफ है, गठबंधन को लेकर ही कांग्रेस आगे बढे़गी। हम यूपीए प्लस की उम्मीद कर रहे हैं। हम चुनाव से पूर्व एक ऐसा रैनबो कोलिशन बनाएंगे, जो चुनावों में एनडीए सरकार को पटखनी दे देगा।

-गठबंधन की सरकार बनी, तो उसका नेतृत्व कौन करेगा?
अभी चुनौती है विकल्प खड़ा करने की। नेतृत्व बड़ी बात नहीं है। लेकिन एनडीए सरकार के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर विकल्प खड़ा करने की क्षमता सिर्फ कांग्रेस में है। कांग्रेस ही उसका नेतृत्व कर सकती है। 

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-कांग्रेस की प्रभाव वाली सीटें घट रही हैं। करीब ढाई सौ सीटें ही ऐसी हैं, जहां कांग्रेस की उपस्थिति दमदार है, इस चुनौती को आप कैसे देखते हैं?
यह कहना ठीक नहीं होगा कि हमारे प्रभाव वाले क्षेत्र घट रहे हैं। हमारी उपस्थिति पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक है। लोग कांग्रेस की तरफ देख रहे हैं, इसलिए परिस्थितियां बदलने में देरी नहीं लगती है। लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां हम लंबे समय से चुनाव नहीं जीते, वहां हम क्षेत्रीय दलों से गठबंधन करेंगे। बिहार में ऐसा हुआ। उत्तर प्रदेश में हमने गठजोड़ किया था। 

-पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस की छवि बेहद खराब थी, आज स्थिति को आप कैसा पाते हैैं?
तब बहुत आरोप लगाए गए थे। लेकिन वे साबित कहां हुए? यहां तक कि 2-जी मामले में भी कोर्ट ने कहा कि इसमें हमें तथ्य नहीं मिला। दरअसल, हमारे खिलाफ दुष्प्रचार बहुत हुआ, जबकि आरोपों में कोई दम नहीं था। मनमोहन सिंह जैसे व्यक्ति को भी, जिनकी साख पूरी दुनिया में है, नहीं बख्शा गया। लेकिन अब जनता सच्चाई से रूबरू हो रही है।

-कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी युवा हैं, पार्टी में युवाओं को कितनी तरजीह मिल रही है?
तरजीह मिल रही है, तभी तो एक बड़े प्रदेश के अध्यक्ष के रूप में मैं आपके सामने बैठा हूं।  

ये भी कहा:-

तीसरे मोर्चे की संभावना पर
एनडीए के खिलाफ जो माहौल बन रहा है, उसमें सभी दल अपनी भूमिका निभाएंगे। तीसरा मोर्चा और फ्रंट पहले भी बने थे, लेकिन वे सफल नहीं हुए। इसलिए यूपीए प्लस ही एक बेहतर विकल्प हो सकता है। विपक्ष को यह बात समझनी होगी कि एनडीए को 33 फीसदी वोट मिले हैं और 67 फीसदी वोट उनके पास है। लेकिन विपक्ष यदि खंडित हो गया, तो फिर उसको इसका फायदा नहीं मिल पाएगा। इसलिए विपक्ष को एकजुट होने की जरूरत है। सबकी भूमिका तय हो जाएगी। दो बातें साफ हैं कि क्षेत्रीय पार्टी का राज्य में प्रभाव अच्छा हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस ही बेहतर विकल्प है। दूसरी, कांग्रेस को पद की लालसा नहीं है। देशहित में जो जरूरी होगा, वह राहुल गांधी करेंगे। 

मुख्यमंत्री के सवाल पर
मैं 26 वर्ष में सांसद बन गया था, 31 में केंद्रीय मंत्री बनाया गया। 33 वर्ष की उम्र में मुझे राहुल गांधी ने प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। बहुत कम उम्र में पार्टी ने बहुत कुछ दिया है। आज समय है कि मैं पार्टी को क्या दे सकता हूं? मेरी प्राथमिकता है राजस्थान चुनाव में बहुमत। फिर विधायक दल तय करेगा कि किसे मुख्यमंत्री बनाया जाना है।

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