यूरेनियम नगरी में विकिरण जागरूकता पर जोर
जादूगोड़ा में विकिरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यूसील ने भाभा ऑडिटोरियम में जन संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया। मुख्य अतिथि डॉ. काचम आनंद राव ने बताया कि विकिरण के स्रोतों को समझना आवश्यक है। उन्होंने स्थानीय लोगों को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर जानकारी लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

जादूगोड़ा। जादूगोड़ा की पहचान देश के प्रमुख यूरेनियम खनन क्षेत्रों में होती है। यहां यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों के कारण समय-समय पर विकिरण को लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा और चिंता बनी रहती है। ऐसे में लोगों में इसको लेकर जागरूकता पैदा करने को लेकर शनिवार को यूसील नरवा पहाड़ स्थित भाभा ऑडिटोरियम में यूसील द्वारा विकिरण जागरूकता अभियान के अंतर्गत जन संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में यूसील के सीएमडी डॉ काचम आनंद राव, निर्देशक (वित्त) विक्रम केसरी दास एवं विशिष्ट अतिथि में बीएआरसी मुंबई से प्रबल चौधरी उपस्थित रहे।
लोगों को संबोधित करते हुए सीएमडी डॉ. काचम आनंद राव ने कहा कि लोग विकिरण को लेकर अफवाहों के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों को समझें और यह जानें कि हमारे आसपास विकिरण के स्रोत क्या हैं। कहा कि जादूगोड़ा, नरवा पहाड़ क्षेत्र में यूसील की खनन एवं प्रसंस्करण गतिविधियों के अलावा आसपास के गांवों में रहने वाली बड़ी आबादी सीधे तौर पर इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। जादूगोड़ा, नरवा पहाड़, तुरामडीह, बागजाता, भाटीन , बंदुहुड़ांग समेत आसपास के इलाकों में विकिरण और पर्यावरणीय सुरक्षा को लेकर लोगों की अपनी-अपनी चिंताएं हैं। विकिरण केवल यूरेनियम खदान या परमाणु संस्थानों से ही नहीं आता। प्राकृतिक रूप से भी मिट्टी, चट्टानों, हवा और अंतरिक्ष से आने वाली कॉस्मिक किरणों के कारण हर स्थान पर एक निश्चित मात्रा में प्राकृतिक विकिरण मौजूद रहता है। इसके अलावा अस्पतालों में होने वाले एक्स-रे और सीटी स्कैन में भी नियंत्रित तरीके से विकिरण का इस्तेमाल किया जाता है।


