सोसाइटी के दखल में कागज से अधिक जमीन, फंसे सदस्य
लगभग 232 सदस्यीय रेलवे कर्मचारी सहकारी गृह निर्माण समिति लि. को बागबेड़ा बड़ौदा घाट में गलत जमीन आवंटित की गई है। एक सदस्य काजल कुमारी ने शिकायत की कि उन्हें जो जमीन दी गई, वह सोसाइटी की है ही नहीं। मामला अभी विचाराधीन है।

लगभग 232 सदस्यीय रेलवे कर्मचारी सहकारी गृह निर्माण समिति लि. बागबेड़ा बड़ौदा घाट से जमीन लेने वाले कुछ सदस्य चक्कर में पड़ गए हैं। चक्कर में इसलिए पड़े हैं, क्योंकि उन्हें जो जमीन दी गई, वर्षों बाद पता चला कि यह जमीन सोसाइटी की है ही नहीं। अर्थात सोसाइटी ने जितनी जमीन खरीदी, उससे अधिक सदस्यों को आवंटित कर दी। एक सदस्य काजल कुमारी को जब इस बात का एहसास हुआ तो उन्होंने सोसाइटी को इसकी जानकारी दी। हालांकि कोई निदान निकलते न देख उन्होंने अतिरिक्त जमीन मूल भूस्वामी सुरेश अग्रवाल व गौतम अग्रवाल से रजिस्ट्री कराई। बाद में उन्होंने जिले के सहायक निबंधक सहयोग समितियां से शिकायत की और नियमानुसार निबंधक सहयोग समितियां के पास 2023 में केस दायर किया। यह मामला अभी विचाराधीन है। परंतु इसकी रिपोर्ट जमशेदपुर के अंचलाधिकारी से मांगी गई थी, जो उन्होंने मापी करवाकर भेज दी है। बताया जाता है कि काजल कुमारी की शिकायत की इससे पुष्टि होती है।
भूमि खरीदी का विवरण
उल्लेखनीय है कि सोसाइटी ने तीन बार में 1995 व 1999 में सुरेश अग्रवाल व गौतम अग्रवाल से 513.10 डिसमिल जमीन खरीदी थी। इतनी ही जमीन पर घर बनाने के लिए प्रस्तुत प्लान को सीओ ने स्वीकृति प्रदान की थी। इसमें पूरब दिशा अर्थात प्रवेश द्वार से पश्चिम दिशा की अंतिम सीमा रेखा तक कुल एक से लेकर 20बी तक सब प्लॉट के रूप में दर्शाया गया है। जबकि वास्तव में भौतिक स्थिति में 20सी सब प्लॉट को भी स्थापित किया गया है। ऐसा स्वीकृत बिल्डिंग प्लान में भी दिखता है। अगर प्लान को बदला गया था तो उसकी कॉपी समिति दिखाने में विफल रही। रजिस्ट्री में जो ट्रेस नक्शा संलग्न है, उसमें पश्चिम दिशा में प्लॉट संख्या 22 में अब भी मूल भूस्वामी का भूखंड बचा हुआ है। हालांकि समिति द्वारा खरीदी गई भूमि से अधिक जमीन को कब्जे में लेकर सब प्लॉट संख्या 90, 20सी और 89 को स्थापित किया गया है, जिसके कारण सब प्लॉट संख्या 90, 20सी, 89 का अंश भाग अवैध प्रतीत होता है।
विवाद की स्थिति
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कोट-
एक विवाद रजिस्ट्रार कोर्ट में चल रहा है। हमने जवाब दे दिया है। सीओ ने मापी कर जांच रिपोर्ट भी भेजी है। सोसाइटी पुरानी है, जबकि वे सचिव हाल में बने हैं।
-संजय शर्मा, समिति के सचिव


