लाल सिग्नल पार करने वाले लोको पायलटों की सजा पर रेलवे बोर्ड ने मांगे सुझाव
रेलवे बोर्ड ने एसपीएडी मामलों में लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट के खिलाफ कार्रवाई के नियमों की समीक्षा शुरू की है। 2018 से लागू गाइडलाइन में बदलाव के लिए सभी जोनल रेलवे से सुझाव मांगे गए हैं। खासकर उन सिग्नलों पर ध्यान दिया जाएगा जो ट्रैक के दाहिने हिस्से में हैं।

प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। सिग्नल पार कर खतरे की स्थिति में पहुंचने यानी एसपीएडी के मामलों में लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट पर होने वाली कार्रवाई के नियम बदल सकते हैं। रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2018 से लागू एसपीएडी की सजा संबंधी गाइडलाइन की तत्काल समीक्षा शुरू कर दी है। इसके लिए एनसीआर समेत सभी जोनल रेलवे से ऐसे मामलों में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों और नियमों में बदलाव को लेकर सुझाव मांगे गए हैं।बोर्ड ने खासतौर पर तीन परिस्थितियों को समीक्षा के दायरे में रखा है। इनमें एडब्लूएस सिस्टम से जुड़े मामले, मल्टी लाइन सेक्शन और ऑटोमेटिक सिग्नल वाले मामले तथा सिग्नल की लोकेशन शामिल है।
खासकर ऐसे सिग्नल, जो ट्रैक के सबसे दाहिने हिस्से में लगे होते हैं, उनमें एसपीएडी होने की स्थिति में मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई के तरीके पर भी जोनल रेलवे से राय मांगी गई है। रेलवे बोर्ड का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एसपीएडी को ट्रेन परिचालन की गंभीर सुरक्षा चूक माना जाता है और ऐसे मामलों में लोको पायलटों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है। अब बोर्ड यह देख रहा है कि अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में एक जैसे नियम लागू करना कितना व्यावहारिक है। उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोनल रेलवे को 15 सितंबर 2026 तक अपने सुझाव भेजने को कहा गया है। इसके बाद इन सुझावों के आधार पर रेलवे बोर्ड स्तर पर आगे की प्रक्रिया होगी।


