ट्रेनों के रद्द रहने और रूट बदलने से बढ़ी यात्रियों की मुश्किल
-पुनपुन पुल पर जलस्तर बढ़ने से लगातार तीसरे दिन नौ मेमू रद्द -हटिया-कोसी और गंगा

गया-पटना रेल सेक्शन के पुनपुन रेल पुल के पास बढ़े जलस्तर का असर तीसरे दिन सोमवार को भी रेल परिचालन पर रहा। पुल संख्या-21 पर जलस्तर बढ़ने के कारण ट्रेनों का परिचालन प्रभावित है। सुरक्षा को देखते हुए गया-पटना के बीच चलने वाली पांच मेमू और पटना-गया के बीच चलने वाली चार मेमू ट्रेनों को सोमवार को भी रद्द रखा गया। लगातार तीसरे दिन सुबह मेमू सेवा ठप रहने से दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी हुई। गया जंक्शन पर ट्रेनों का रद्द किए जाने से संबंधित समय से सूचना नहीं मिलने पर यात्रियों में आक्रोश था। सुबह की मेमू ट्रेनों का परिचालन रद्द रहने से सिंगरौली एक्सप्रेस और भभुआ इंटरसिटी में यात्रियों की भीड़ बढ़ी रही। रेलवे ने जलस्तर और ट्रैक की सुरक्षा को देखते हुए धनबाद-पटना, हटिया-पटना सहित हटिया-कोसी समेत छह ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया। मेमू ट्रेनों के लगातार रद्द रहने और एक्सप्रेस ट्रेनों का रूट बदलकर चलाये जाने से गया जंक्शन पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। साथ ही कुछ समय के लिए अफरातफरी की स्थिति बनी रही。
यात्री परेशान
ट्रेनों का परिचालन बाधित रहने के कारण बड़ी संख्या में यात्री बस और अन्य सड़क परिवहन साधनों से सफर करने को मजबूर हैं। यात्रियों का कहना है कि यदि ट्रेन रद्द होने की सूचना समय से पहले स्पष्ट रूप से जारी कर दी जाए तो वे वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते हैं। अचानक स्टेशन पहुंचने के बाद ट्रेन रद्द होने की जानकारी मिलने से यात्रियों में नाराजगी बढ़ रही है। जलस्तर लगातार बढ़ने के बीच अब यात्रियों की नजर रेलवे की सुरक्षा जांच और पुल की स्थिति पर टिकी है।
पुल और ट्रैक की सुरक्षा
पुनपुन रेल पुल पर बाढ़ का पानी चढ़ना महज परिचालन बाधित होने का मामला नहीं है बल्कि पुल और ट्रैक की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर जोखिम है। तेज बहाव में पुल के पायों के आसपास की मिट्टी और रेत कटने लगती है। इसे स्कॉर कहा जाता है। लगातार कटाव से नींव कमजोर हो सकती है और पुल की स्थिरता प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। उफनती नदी अपने साथ पेड़, लकड़ी और मलबा भी लाती है जो पुल के पायों या गर्डर में फंसकर पानी के दबाव को बढ़ा सकता है।
खतरा और सुरक्षा
रेलवे के अभियंत्रण विभाग के विशेषज्ञ का कहना है कि पानी का स्तर बढ़ने पर पटरियों के नीचे की गिट्टी मिट्टी बह सकती है। इससे ट्रैक अस्थिर, टेढ़ा या हवा में लटक सकता है और ट्रेन के गुजरने पर दुर्घटना का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। यही वजह है कि जलस्तर और पुल की स्थिति पर निगरानी रखते हुए रेलवे पहले गति प्रतिबंधित करता है। खतरा बढ़ने पर ट्रेनों को रोकना, रद्द करना या वैकल्पिक मार्ग से चलाना यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी हो जाता है। ऐसे हालात में रेल यातायात पूरी तरह ठप होने की स्थिति भी बन सकती है।
अन्य ट्रेनों की जानकारी
गया-पटना सेक्शन पर रद्द रहीं मेमू ट्रेनें
-63242- गया–पटना मेमू
-63244- गया–पटना मेमू
-63245- पटना–गया मेमू
-63247- पटना–गया मेमू
-63248-गया–पटना मेमू
-63251- पटना–गया मेमू
-63256-गया–पटना मेमू
-63250-गया–पटना मेमू
-63253-पटना–गया मेमू
वैकल्पिक मार्ग से चलने वाली ट्रेनें
-18625-पूर्णिया कोर्ट-हटिया एक्सप्रेस
-18626- हटिया– पूर्णिया कोर्ट एक्सप्रेस
-13329- धनबाद–पटना गंगा दामोदर एक्सप्रेस
-13330 — पटना–धनबाद गंगा दामोदर एक्सप्रेस ।
-15137- राजगीर–बनारस एक्सप्रेस बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस
-15138 — बनारस-राजगीर बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस


