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हिंदी न्यूज़ देशचिंतन शिविर में राहुल गांधी का यह बयान न बन जाए मुसीबत? क्षेत्रीय पार्टियां बिगाड़ सकती हैं खेल

चिंतन शिविर में राहुल गांधी का यह बयान न बन जाए मुसीबत? क्षेत्रीय पार्टियां बिगाड़ सकती हैं खेल

राहुल गांधी के इस बयान से ना सिर्फ क्षेत्रीय पार्टियां नाराज नजर आ रही हैं बल्कि राजनीतिक विश्लेषक राहुल के इस बयान के नफा नुकसान के आकलन में जुट गए हैं।

चिंतन शिविर में राहुल गांधी का यह बयान न बन जाए मुसीबत? क्षेत्रीय पार्टियां बिगाड़ सकती हैं खेल
Gauravलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 16 May 2022 11:22 PM

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हाल ही में राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस के चिंतन शिविर की चर्चा रही। माना जा रहा था कि कांग्रेस के इस चिंतन शिविर में पार्टी नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं और सहयोगी पार्टियों को कुछ ठोस संदेश दे पाएगी, लेकिन ऐसा होता नहीं दिखा। इसके उलट राहुल गांधी का एक बयान सुर्खियां बटोर रहा है जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय पार्टियों का जिक्र कर दिया। राहुल गांधी के इस बयान से ना सिर्फ क्षेत्रीय पार्टियां नाराज नजर आ रही हैं बल्कि राजनीतिक विश्लेषक राहुल के इस बयान के नफा नुकसान के आकलन में जुट गए हैं।

'क्षेत्रीय पार्टियां भाजपा को नहीं हरा सकती हैं'
दरअसल, कांग्रेस का राजस्थान के उदयपुर में तीन दिन का चिंतन शिविर खत्म हो गया। इस चिंतन शिविर में राहुल गांधी ने बयान दिया कि अगर कोई दल भाजपा को हरा सकती है तो वह कांग्रेस पार्टी है, क्षेत्रीय पार्टियां भाजपा को नहीं हरा सकती हैं। इस दौरान राहुल गांधी ने आरएसएस-भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इनकी विचारधारा देश के लिए खतरा है और क्षेत्रीय पार्टियों के पास ऐसी विचारधारा नहीं कि वो भाजपा को हरा सके। 

क्षेत्रीय दलों ने जताई असहमति
राहुल गांधी के इस बयान पर क्षेत्रीय दलों ने पलटवार करते हुए इसे बचकाना बताया है। समाजवादी पार्टी ने कहा चिंतन शिविर का निष्कर्ष अपने आप में दिखाता है कि कांग्रेस देश की राजनीति के लिए कितनी खतरनाक है। वहीं आरजेडी के प्रवक्ता मनोज कुमार झा ने कहा कि भाजपा के खिलाफ लड़ाई में क्षेत्रीय दल लोकसभा में मजबूत हैं। कांग्रेस को उन्हें अपना साथी मानना चाहिए और उन्हें 'ड्राइविंग सीट' पर रहने देना चाहिए। झा ने यह भी कहा कि यही बात राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी कही है।

राहुल गांधी के बयान के क्या हैं मायने
असल में राहुल गांधी का यह बयान अपने आप में कई मायने समेटे हुए है। कांग्रेस पर नजर रखने वाले राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई राज्यों में भाजपा के मुकाबले में क्षेत्रीय दल ही खड़े हैं और वहां कांग्रेस कमजोर हो रही है। लेकिन इसके बावजूद भी भाजपा राज्यों में लगातार सरकारें बना रही है। इस बात को कांग्रेस नेतृत्व अच्छे से समझता है कि अगर राज्यों में क्षेत्रीय दल मजबूत होंगे तो कांग्रेस कमजोर होगी और अगर कांग्रेस को मजबूत होना है तो उसे अपनी अखिल भारतीय पहचान को बनाए रखना होगा।

क्या क्षेत्रीय पार्टियां बिगाड़ सकती हैं कांग्रेस का खेल
यह बात सही है कि कांग्रेस लंबे समय तक अखिल भारतीय पहचान वाली पार्टी रही है। भाजपा के उभार के बाद कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों ने अब कांग्रेस की जगह ले ली है। राहुल गांधी अपने इस बयान से भले ही अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का उत्साह बढ़ा रहे हों लेकिन वे इसके साथ ही साथ यह भी संदेश देना चाह रहे हैं कि कांग्रेस ही वो पार्टी है जो भाजपा को हरा सकती है। और वे ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हाल के वर्षों में ऐसा कई बार देखा गया है कि कई दल भाजपा के मुकाबले के लिए इकठ्ठा होने की कोशिश करते आए हैं।

फिलहाल राहुल गांधी के इस बयान के बाद कई राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आई है। दूसरी तरफ खुद कांग्रेस पार्टी के अंदर असंतुष्ट नेताओं की फौज है। इतना ही नहीं कांग्रेस के तमाम नेता पार्टी छोड़कर या तो भाजपा में शामिल हो रहे हैं या फिर आम आदमी पार्टी जैसी अन्य पार्टियों में शामिल हो रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया है कि कांग्रेस के नेता खुद यह चाहते हैं कि पहले कांग्रेस को इन मामलों से भी निपटना होगा।

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