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26 अक्तूबर, 2020|9:53|IST

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मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पैशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना: राहत इंदौरी

rahat indori

कोरोना वायरस ने देश को वह दर्द भी दे दिया जिससे कभी 'राहत' नहीं मिल पाएगी। दुनियाभर में तबाही मचाने वाले इस वायरस ने राहत इंदौरी साहब को भी छीन लिया है। देश के मशहूर शायर राहत इंदौरी की सांसें थम गई हैं, लेकिन अपने गीत, गजलों, शायरी, नज्मों से वह हमेशा हर दिल में धड़कते रहेंगे। 

इसी साल उन्होंने 26 जनवरी को दो लाइनों में अपनी पूरी शख्सियत बताते हुए अपनी 'आखिरी ख्वाहिश' लिखी थी। उन्होंने जो लिखा उससे पता चलता है कि वह अपने वतन से कितनी मोहब्बत करते थे। उन्होंने लिखा था, ''मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पैशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना।''

राहत इंदौरी ने मौत और जिंदगी को लेकर काफी लिखा है... 

अब ना मैं हूं, ना बाकी हैं, जमाने मेरे, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फसाने मेरे
जिंदगी है तो नए जख्म भी लग जाएंगे, अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।

आंख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो, ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो,
एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तों, दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो।

एक वतन इक रोज तेरी खाक में खो जाएंगे, सो जाएंगे
मरके भी रिश्ता नहीं टूटेगा हिन्दुस्तान से, ईमान से

दो गज सही ये मेरी मिलकियत तो है, ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया

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  • Web Title:rahat indori famous shayari write hindustan on my head after i die