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चीन सीमा पर तनातनी के बीच लद्दाख सेक्टर में वायुसेना तैनात कर सकती है राफेल

राहुल सिंह (हिटी),नई दिल्ली।Published By: Rajesh Kumar
Sun, 19 Jul 2020 09:52 PM
चीन सीमा पर तनातनी के बीच लद्दाख सेक्टर में वायुसेना तैनात कर सकती है राफेल

चीन के साथ सीमा पर तनातनी के बीच भारतीय वायुसेना लद्दाख सेक्टर में नए लड़ाकू विमान राफेल की तैनाती कर सकती है, ताकि सैन्यबलों को मजबूती दिया जा सके। यहां पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच विवाद जारी है और सेनाओं को हटाना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया बनी हुई है। वायुसेना के इस हफ्ते होने जा रहे शीर्ष कमांडरों की बैठक से ठीक पहले पूरे मामले से वाकिफ सूत्र ने यह जानकारी दी।

वायुसेना के विशेष अनुरोध पर फ्रांस भारत को राफेल लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में तेजी करने जा रहा है और पहले बैच में 4 भेजने की जगह वे अब वे 6 लड़ाकू विमान 27 जुलाई को अंबाला की वायुसेना छावनी में भेज रहा है। एक आधिकारिक सूत्र ने पहचान न बताने की शर्त पर कहा- एयर एंड ग्राउंड क्रूज को पिछले एक साल के दौरान फ्रांस में लड़ाकू विमान और एडवांस वीपन सिस्टम की ट्रेनिंग दी गई है। उन्होंने बताया, वायुसेना चाहती है कि जल्द से जल्द राफेल को ऑपरेशनाइल स्तर पर लाया जा सके और नए लड़ाकू विमानों को लद्दाख समेत जहां भी आवश्यकता हो उसे तैनात किया जा सके।

नई दिल्ली में वायुसेना की 22 से 24 जुलाई के बीच कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान राफेल लड़ाकू विमानों की तैनाती पर चर्चा हो सकती है, जहां पर वायुसेना के टॉप सातों कमांडर इन चीफ चीन के साथ विवाद को लेकर संभावित तौर पर चर्चा करेंगे।

समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि एयर चीफ मार्शल भदौरिया के नेतृत्व में कॉन्फ्रेंस के दौरान सभी सात कमांडर इन चीफ मौजूद रहेंगे। इस दौरान चर्चा का एक मुख्य एजेंडा रहेगा... चीन के साथ लगती सीमा पर स्थिति और पूर्वी लद्दाख और उत्तरी सीमाओं के अग्रिम ठिकानों पर जवानों की हुई तैनाती। वायु सेना ने अपने बेड़े में आधुनिक लड़ाकू विमान, जैसे- मिराज 2000, सुखोई-30, और मिग-29 को अग्रिम ठिकानों पर तैनात किया है जहां से वे दिन और रात दोनों समय ऑपरेशन कर रहे हैं।

इसके साथ ही, चीन से लगती सीमा पर वायुसेना ने अपने अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर को भी लगा रखा है जो पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में रात के वक्त भी उड़ान भर रहे हैं। फ्रांस से इस महीने के आखिर तक अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों की डिलीवरी होगी, जिसकी फौरन तैनाती और उसे ऑपरेशन स्तर पर लाने के बारे में भी चर्चा की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि राफेल अत्याधुनिक हथियारों से लैस है और इसके एयरफोर्स में शामिल होने के बाद पड़ोसी देशों की तुलना में भारतीय वायुसेना को बढ़त मिलेगी। उन्होंने कहा कि ये लड़ाकू विमान अत्याधुनिक चीजों के साथ लंबी दूरी के हथियार जैसे एयर टू एयर मिसाइल... भारत को चीन और पाकिस्तान के मुकाबले बढ़त दिलाते हैं। वायु सेना रूसी मूल के बेड़े के साथ फ्रांसीसी सेनानियों के एकीकरण पर भी काम कर रही है और उन्हें संचालन में अनुकूल बनाती है।

आपातकालीन खरीद के रास्ते भारत के सबसे बड़े रक्षा खरीद में भारत के नेगोसिएशन हेड के तौर पर वायुसेना चीफ ने 60 हजार करोड़ के 36 राफेल विमानों की खरीद में अहम भूमिका निभाई है। राफेल के दो स्क्वॉड्रन के बाद वायुसेना के लड़ाकू विमानों की कम होती संख्या में जहां एक तरफ इजाफा होगा तो वहीं इसकी लंबी दूरी की मारक क्षमता भी बढ़ेगी।

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