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रायबरेली रेल हादसा: इस कारण इंजन सहित बेपटरी हुई न्यू फरक्का एक्सप्रेस

new farakka express

रायबरेली में बुधवार को न्यू फरक्का एक्सप्रेस उपकरण नाकाम होने के कारण हादसे का शिकार बन गई। ट्रेन को मुख्य लाइन से गुजारने के लिए प्वांइट नहीं बन सका, लेकिन सिग्नल हरा हो गया, जिससे वह इंजन सहित बेपटरी हो गई। ऐसा समझा जा रहा है कि प्वाइंट के बीच कोई पत्थर या फिर अन्य वजह से सिग्नल नहीं बन पाया। इससे 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार में दौड़ रही ट्रेन लूप लाइन पर जाकर बेपटरी हो गई। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ देर पहले एक ट्रेन को लूप लाइन से गुजारा गया था। इसके बाद फरक्का एक्सप्रेस को मुख्य लाइन से गुजारने के लिए फिर प्वांइट सेट किया गया, जिसे रेलवे की तकनीकी भाषा में ट्रेन के लिए पाथ (रास्ता) बनाना कहा जाता है। 

प्वांइट सेट होने पर पाथ बन जाता है, जिसके बाद ही सिग्नल हरा होता है। लेकिन इस मामले में प्वांइट सेट नहीं हुआ, पर सिग्नल हरा हो गया। रेल विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा बहुत कम होता है कि प्वांइट सेट न हो और सिग्नल हरा हो जाए। यह पाथ-वे बनाने वाले इंजीनियरिंग विभाग और सिग्नल एंड टेलीकॉम विभाग की विफलता का नतीजा है। रनिंग स्टाफ से बातचीत करने वाले एक सूत्र ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया चालक ने सिग्नल हरा देखकर ट्रेन की रफ्तार बनाए रखी। हालांकि ट्रेन हादसे की असली वजह रेल संरक्षा के मुख्य आयुक्त शैलेष पाठक की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। 

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सिग्नल प्रणाली विश्वसनीयता पर सवाल 

जिस सिग्नल प्रणाली के भरोसे रेलवे हर रोज 12 हजार से अधिक ट्रेनें दौड़ा रहा है, उसकी विश्वसनीयता पर रेल मंत्रालय की खुद की रिपोर्ट में प्रश्नचिह्न  लग चुका है। 

डेटा लॉगर खोलेगा सच

स्टेशन के रिले रूम में एक डेटा लॉगर लगा होता है, जबकि मास्टर डाटा लॉगर वरिष्ठ सिग्नल दूरसंचार प्रबंधक के कक्ष में होता है। किसी भी तरह की गड़बड़ी डेटा लॉगर में दर्ज हो जाती है। इस मामले में स्टेशन मास्टर ने ट्रेन को गुजारने के लिए जो पाथ (रास्ता) बनाया होगा उसकी जानकारी डेटा लॉगर के मॉनिटर पर मौजूद होगी। 

पांच वर्षों में हुए बड़े रेल हादसे  

10 अक्तूबर, 2018: यूपी के रायबरेली जिले में न्यू फरक्का एक्सप्रेस के पटरी से उतरने से सात लोगों की मौत।

19 अगस्त, 2017: यूपी के मुजफ्फरनगर जनपद के खतौली में र्कंलग-उत्कल एक्सप्रेस पटरी से उतरी,  20 मरे।

22 जनवरी, 2017: आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में हीराखंड एक्सप्रेस के आठ डिब्बे पटरी से उतरे, करीब 40 की मौत।

20 नवंबर, 2016: यूपी के कानपुर के पास पुखरायां में पटना-इंदौर एक्सप्रेस के 14 कोच पटरी से उतरे, 150 लोग मारे गए।

20 मार्च, 2015: यूपी के बछरावां में देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस के बेपटरी होने से 36 लोगों की मौत।

04 मई, 2014: महाराष्ट्र के नागोठाने और रोहा स्टेशन के बीच दिवा सावंतवादी पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतरी, 20 लोगों की जान गई।

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2018 में सबसे कम दुर्घटनाएं

रेल संरक्षा के लिहाज से 2018 पिछले पांच साल में सबसे अच्छा साबित हुआ है। उसमें भी पिछले साल की तुलना में इस वर्ष दुर्घटनाओं में कमी आई है। सितंबर 2017 और अगस्त 2018 के बीच हुई 75 रेल दुर्घटनाओं में 40 लोग मारे गए, जबकि सितंबर 2016 व अगस्त 2017 के बीच 80 रेल दुर्घटनाओं में 249 लोगों की जान गई थी। पूर्व के वर्षों में सितंबर 2013 और अगस्त 2014 के बीच 139 रेल हादसों में 275 लोगों ने जान गंवाई थी, सितंबर 2014 अगस्त 2015 के बीच 108 हादसों में 196 लोग मारे गए थे। 

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  • Web Title:Rae Bareli Rail Incident because of equipment failures New Farakka Express met with an accident