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5 जून, 2020|11:47|IST

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कोरोना: रेडियो इनफ्लुएंजा जागरूक करता रहा, लोगों ने सुना ही नहीं

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'रेडियो इनफ्लुएंजा' कोरोना जैसी महामारी के खतरों के प्रति आगाह करता आ रहा है। 1918 के स्पैनिश फ्लू का भयावह मंजर बयां करने वाला यह चैनल बता रहा है कि कैसे उस दौर में मरीज के छींकने या खांसने के दौरान निकलीं पानी की बूंदें 12 फुट दूर खड़े शख्स को संक्रमित कर देती थीं। कैसे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और खांसने-छींकने के दौरान नाक-मुंह को अच्छी तरह से ढंकना सबको सुरक्षित रख सकता है।

हालांकि, 'रेडियो इनफ्लुएंजा' पर वैश्विक इतिहास के उस काले अध्याय से रूबरू होने के बावजूद लोग नहीं चेते और कोरोना महामारी दुनिया के तमाम देशों में पैर पसारती चली गई।

अमेरिकी कलाकार के दिमाग की उपज : 'रेडियो इनफ्लुएंजा' लंदन में बसे अमेरिकी कलाकार जॉर्डन बेसमैन के दिमाग की उपज है। उन्होंने दो साल पहले 1918 में वैश्विक स्तर पर पांच करोड़ से अधिक लोगों की जान ले चुकी स्पैनिश इनफ्लुएंजा महामारी की 100वीं बरसी के मौके पर इस ऑनलाइन रेडियो चैनल की शुरुआत की थी।

दुनिया महामारी से लड़ने को तैयार नहीं: बेसमैन के मुताबिक सभी 'ऑडियो एंट्री' अखबारों से अक्षरश: नहीं ली गई हैं। लोगों के सामने उस नाजुक दौर की भयावहता बयां करने के लिए शब्दों में मामूली फेरबदल कर कुछ ऑडियो इफेक्ट भी शामिल किए गए हैं, ताकि घटनाएं काल्पनिक न लगें।
 
जागरुक करना था मकसद : बेसमैन बेसमैन कहते हैं, 'मैं दुनिया को डराने की मंशा नहीं रखता था। मैं यह चाहता था कि हम सब इस बात से सजग हो जाएं कि भविष्य हमें कैसे-कैसे मनहूस दिन दिखा सकता है। हम उन गलतियों से बचें, जिसने पिछली महामारी को भयावह स्तर पर पहुंचा दिया था।'

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  • Web Title:Radio Influenza awaring people about coronavirus but didnt hear