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विधायकों के बेटों को नौकरी देकर फंसी पंजाब सरकार, कैप्टन को अपनों ने ही घेरा

पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार पार्टी के 2 विधायकों के बेटों को नौकरी देकर अब अपनी ही पार्टी के नेताओं के सवालों से घिर गई है। दरअसल राज्य सरकार की तरफ से विधायक राकेश पांडे के बेटे को डायरेक्टर...

विधायकों के बेटों को नौकरी देकर फंसी पंजाब सरकार, कैप्टन को अपनों ने ही घेरा
Nishant Nandanलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 19 Jun 2021 08:31 PM
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पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार पार्टी के 2 विधायकों के बेटों को नौकरी देकर अब अपनी ही पार्टी के नेताओं के सवालों से घिर गई है। दरअसल राज्य सरकार की तरफ से विधायक राकेश पांडे के बेटे को डायरेक्टर नायब तहसीलदार और विधायक फतेह जंग सिंह बाजवा के बेटे को पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर नौकरी देने से संबंधित एक प्रस्ताव कैबिनेट में पास हुआ है। इन दोनों विधायक पुत्रों को आतंकवाद पीड़ित परिवार कोटे से नौकरी दी गई है। 

अपनों ने 'कैप्टन' सरकार को घेरा

लेकिन पंजाब की कैप्टन सरकार द्वारा लिये गये इस फैसले पर अब कांग्रेस पार्टी के ही नेता सवाल उठा रहे हैं। पंजाब कांग्रेस प्रमुख सुनील झाखड़ ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से अपील करते हुए कहा है कि पार्टी विधायकों के पुत्रों को नौकरी देने के अपने फैसलों पर वो फिर से विचार करें। इतना ही नहीं पार्टी चीफ ने यह भी कहा कि सीएम, लोगों की भावना को ध्यान में रखते हुए तुरंत इस नियुक्ति को रद्द कर दें। पार्टी के एक विधायक कुलजीत नागरा ने भी पंजाब सरकार से अपील करते हुए कहा है कि विधायक पुत्रों को नौकरी देने के अपने फैसले को वो वापस ले लें।

सिद्धू की पत्नी ने उठाए सवाल

इधर पटियाला के सनौर विधानसभा क्षेत्र के चौरा गांव में पत्रकारों से बात करते हुए नवजोत कौर सिद्धू ने इस मामले पर कहा कि बिना योग्यता के किसी को भी कोई पद नहीं दिया जाना चाहिए, खासकर उन लोगों को जो पहले से ही आर्थिक रूप से संपन्न हैं। कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी ने कहा कि 'बल्कि किसी खिलाड़ी या स्वतंत्रता सेनानी के परिवार के सदस्य को नौकरी दी जा सकती थी..मुझे नहीं लगता कि बिना कोई परीक्षा पास किए आप तहसीलदार के रूप में शामिल हो सकते हैं या पुलिस में शामिल हो सकते हैं।'

भारतीय जनता पार्टी पंजाब के मुख्य प्रवक्ता अनिल सरीन ने राज्य सरकार की तरफ से विधायक पुत्रों को नौकरी देने के मामले में मीडिया से बातचीत में कहा है कि मुख्यमंत्री ने अपने खिलाफ बगावत रोकने के लिए दोनों विधायकों के साथ सौदा कर नौकरियां प्रदान कर सत्ता बचाने का प्रयास किया है।

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