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डस्टबिन में फेंका पुणे के रईसजादे का ब्लड सैंपल, हर हाल में बचाना चाहते थे डॉक्टर

Pune Road Accident Update: पुणे के पोर्शे कांड में एक बड़ा खुलासा हुआ है। सोमवार को पुणे पुलिस ने बताया है कि नाबालिग आरोपी का ब्लड सैंपल लेने के बाद उसे डस्टबिन में फेंक दिया गया था।

डस्टबिन में फेंका पुणे के रईसजादे का ब्लड सैंपल, हर हाल में बचाना चाहते थे डॉक्टर
Nisarg Dixitलाइव हिन्दुस्तान,पुणेMon, 27 May 2024 11:50 AM
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पुणे के पोर्शे कांड में एक बड़ा खुलासा हुआ है। सोमवार को पुणे पुलिस ने बताया है कि नाबालिग आरोपी का ब्लड सैंपल लेने के बाद उसे डस्टबिन में फेंक दिया गया था। पुलिस ने सबूतों से छेड़छाड़ और सैंपल बदलने के मामले में दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले पुलिस की तरफ से आशंका जताई जा रही है कि इस मामले में ड्राइवर को फंसाने की कोशिश की जा रही है।

19 मई को हुई घटना के बाद नाबालिग आरोपी को मेडिकल जांच के लिए ससून जनरल हॉस्पिटल लाया गया था। अब पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने दावा किया है कि ससून जनरल हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने आरोपी के खून को किसी अन्य व्यक्ति के खून से बदल दिया था, जिसने शराब के सेवन नहीं किया था। इतना ही नहीं उनका दावा है कि डॉक्टरों ने आरोपी के सैंपल को डस्टबिन में फेंक दिया था।

पुलिस ने सोमवार को ही फॉरेंसिक विभाग के एक प्रमुख और एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान डॉक्टर अजय तावरे और श्रीहरि हरनोर के तौर पर हुई है। फिलहाल, इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। खास बात है कि शुरुआती जांच में खून में एल्कोहल नहीं मिली थी, लेकिन अन्य अस्पताल में जब दूसरी जांच हुई और DNA को भी जांचा गया, तब पता लगा कि दोनों सैंपल अलग-अलग व्यक्तियों के थे।

इसके बाद जांचकर्ताओं को संदेह हुआ कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों ने नाबालिग आरोपी को बचाने के लिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुमार ने प्रेस वार्ता में कहा, 'नाबालिग का ब्लड सैंपल लेने वाले डॉक्टर श्रीहरि हलनोर को बीती रात गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ के दौरान उसने बताया है कि उसने फॉरेंसिक्स के HOD डॉक्टर अजय तावरे के निर्देशों पर ब्लड सैंपल बदल दिए थे।' उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में आपराधिक साजिश, जालसाजी और सबूत तबाह करने के आरोप भी शामिल हो गए हैं।

उन्होंने कहा, '...हमें कल फॉरेंसिक रिपोर्ट मिली है और यह खुलासा हुआ है कि ससून हॉस्पिटल में कलेक्ट किए गए सैंपल, जिनपर डॉक्टरों ने नाबालिग आरोपी का नाम लिखा था, वह नाबालिग आरोपी के नहीं थे।'