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हादसा गंभीर था, पर हमारे हाथ बंधे हैं... पोर्श कांड वाले नाबालिग को हाई कोर्ट ने दे दी बेल

पुणे पोर्श कार हादसा मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी किशोर को निगरानी गृह से रिहा करने का आदेश दिया है। हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं।

हादसा गंभीर था, पर हमारे हाथ बंधे हैं... पोर्श कांड वाले नाबालिग को हाई कोर्ट ने दे दी बेल
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईTue, 25 Jun 2024 04:02 PM
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पुणे पोर्श कार हादसा मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी किशोर को निगरानी गृह से रिहा करने का आदेश दिया है। डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यह हादसा तो गंभीर था मगर हमारे हाथ बंधे हुए हैं। मालूम हो कि पुणे के कल्याणी नगर में 19 मई को 2 आईटी पेशेवरों की तब मौत हो गई थी, जब उनकी मोटरसाइकिल को तेज रफ्तार पोर्श कार ने टक्कर मार दी थी। कार को कथित तौर पर नशे की हालत में किशोर चला रहा था। किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य एलएन दानवाड़े की ओर से सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने सहित बहुत ही नरम शर्तों पर आरोपी को जमानत दे दी गई। इसके बाद इस मामले को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश तेज हो गया।

पीठ ने कहा कि जेजेबी के रिमांड आदेश अवैध थे और अधिकार क्षेत्र के बिना पारित किए गए थे। अदालत ने कहा कि दुर्घटना के बाद लोगों की प्रतिक्रिया और सार्वजनिक आक्रोश के बीच आरोपी की उम्र पर विचार नहीं किया गया। आरोपी 18 वर्ष से कम उम्र का है इसलिए उसकी उम्र पर विचार किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि न्यायालय कानून, किशोर न्याय अधिनियम के उद्देश्यों और प्रावधानों से बंधा हुआ है। उसे अपराध की गंभीरता के बावजूद, कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी नाबालिग आरोपी के साथ वयस्क से अलग व्यवहार करना चाहिए। अदालत ने कहा कि आरोपी पहले से ही पुनर्वास के दौर से गुजर रहा है जो कि प्राथमिक उद्देश्य है। उसे पहले ही मनोवैज्ञानिक के पास भेजा जा चुका है और यह सिलसिला जारी रहेगा।

'आरोपी को पहले जमानत दी, फिर हिरासत में ले लिया'
बॉम्बे हाई कोर्ट में पुणे पोर्श कार हादसा मामले को लेकर बीते शुक्रवार को भी सुनवाई हुई थी। इस दौरान एचसी ने कहा कि नाबालिग आरोपी को पहले जमानत देना और फिर उसे हिरासत में ले लेना व सुधार गृह में रखना क्या कैद के समान नहीं है? जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि दुर्घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी। अदालत ने कहा, ‘2 लोगों की जान चली गई। यह बहुत दर्दनाक हादसा तो था ही, लेकिन बच्चा भी मेंटल ट्रॉमा में था।’ खंडपीठ ने पुलिस से यह भी पूछा कि कानून के किस प्रावधान के तहत नाबालिग आरोपी को जमानत देने के आदेश में संशोधन किया गया और उसे 'कैद' में किस आधार पर रखा गया।

आरोपी के पिता को भी मिल चुकी है जमानत
इससे पहले शुक्रवार को पुणे की एक अदालत ने पोर्श दुर्घटना से जुड़े मामले में किशोर आरोपी के पिता को जमानत दी थी। हालांकि, किशोर का पिता जेल में ही रहेगा क्योंकि वह घटना से संबंधित अन्य मामलों में भी आरोपी है। इसमें अल्कोहल टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल में हेरफेर और दुर्घटना का दोष लेने के लिए अपने ड्राइवर को गलत तरीके से बंधक बनाना शामिल है। अदालत ने पांच अन्य आरोपियों को भी जमानत दे दी। इनमें 2 बार के मालिक और प्रबंधक भी शामिल हैं जिन्हें कथित तौर पर कम उम्र के व्यक्ति को शराब परोसने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
(एजेंसी इनपुट के साथ)