Pulwama Terror Attack Security forces will create common strategies to deal with suicide attacks - आत्मघाती हमलों से निपटने के लिए साझा रणनीति बनाएंगे सुरक्षा बल DA Image
14 दिसंबर, 2019|4:51|IST

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आत्मघाती हमलों से निपटने के लिए साझा रणनीति बनाएंगे सुरक्षा बल

Indian Army Soldiers

कश्मीर में सीआरपीएफ काफिले पर हुए बड़े आत्मघाती हमले के सुरक्षाबल अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं। सेना, अर्धसैनिक बलों एवं राज्य पुलिस के बीच तालमेल बढ़ाकर ऐसे हमलों से निपटने की साझा रणनीति बनेगी। इसके अलावा सुरक्षा बलों के काफिले की सुरक्षा के लिए भी नए उपायों की घोषणा हो सकती है ताकि काफिले के बीच में बिना चेक किए कोई वाहन नहीं घुस पाएं।

सेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि आतंकियों द्वारा किए इस आत्मघाती हमले के बाद यह आशंका पैदा हो सकती है कि वे ऐसे हमले और भी कर सकते हैं। सुरक्षा बलों के लिए यह बड़ी चुनौती है। खासकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जहां वाहनों की संख्या काफी होती है। दूसरे राजमार्गो के आसपास आबादी होने से काफिलों के बीच में स्थानीय वाहन घुस जाते हैं। सेना एवं सुरक्षा बल चाहते हैं कि वाहनों की चेकिंग के लिए राज्य पुलिस के साथ मिलकर चेक पोस्टें बिनाई जाए जिनमें एंट्री प्वाइंट पर सभी वाहनों की चेकिंग अनिवार्य की जाए। अभी ऐसी चेकिंग वाहनों के श्रीनगर या बड़े शहरों में प्रवेश पर तो होती है। लेकिन राजमार्गों पर नहीं।

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सूत्रों के अनुसार जिस वाहन से सीआरपीएफ के काफिले पर हमला हुआ उसकी किसी चेक पोस्ट पर चेंकिग नहीं हुई। दरअसल मौजूदा व्यवस्था के तहत कभी-कभी वाहनों की अचानक चेकिंग होती है। सभी वाहनों को चेक नहीं किया जाता है। इसके कई कारण हैं। सड़क पर लंबा जाम लग जाता है। स्थानीय लोग नाराजगी प्रकट करते हैं। सड़कों में एंट्री प्वाइंट बहुत ज्यादा हैं और हर प्वाइंट पर चेक पोस्टें नहीं बनी हैं। सूत्रों ने कहा कि हमले वाले वाहन के बारे में अंदाजा है कि यह संभवत अवंतीपुरा के आसपास की आबादी से ही कहीं काफिले में घुसा हो सकता है। दरअसल, राजमार्ग पर आबादी की वजह से कई एंट्री प्वाइंट है। प्रत्येक एंट्री प्वाइंट पर ऐसी चेकिंग सुविधाएं विकसित करनी होंगी।

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लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह (सेवानिवृत्त) के अनुसार वाहनों में गोला-बारुद भरकर आत्मघाती हमले सबसे ज्यादा किसी वक्त में लिट्टे ने किए थे। तब भारतीय सेना ने वहां जाकर इन वाहनों की धरपकड़ के लिए जगह-जगह चेक पोस्टें बना दी थी और उन्हें अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया था। ऐसा ही कश्मीर में किए जाने की जरूरत है। सिंह कहते हैं कि ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए सेना, अर्धसैनिक बल और राज्य पुलिस को मिलकर कार्य करना होगा। तीनों के कार्य विभाजित हैं और अगर तीनों पक्ष अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाएं तो ऐसे हमलों को काफी हद तक नाकाम किया जा सकता है।

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