शिक्षकों और कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर किया विरोध
राज्य सरकार द्वारा स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन के खिलाफ कॉलेज शिक्षक और कर्मचारी संघ ने विरोध जताया। काला बिल्ला लगाकर विरोध करते हुए, संघ ने सरकार से संशोधन प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन में शिक्षकों और कर्मचारियों ने सरकारी फैसले को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विपरीत बताया।

राज्य सरकार द्वारा सूबे के स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन और विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को लेकर कॉलेज शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संघ द्वारा जमकर विरोध जताया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को टीएस कॉलेज शिक्षक और कर्मचारी संघ के सदस्यों नें संयुक्त रूप से काला बिल्ला लगाकर विरोध जताया और शिक्षा हित में उक्त अधिनियम और संसोधन प्रस्ताव को वापस लेने की सरकार से मांग की। कॉलेज शिक्षक संघ अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार दुबे और कर्मचारी संघ के सचिव मुकेश कुमार की अगुवाई में किया गया।
विरोध का कारण
विरोध प्रदर्शन में सम्राट सरकार के इस फैसले को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विपरीत बताया गया। संघ के अनुसार सरकार के इस तुगलकी फैसले से विश्वविद्यालय के अकादमीक परिषद, अध्ययन बोर्ड, संकाय व परीक्षा समिति जैसी वैधानिक संस्थाओं की प्रभावशीलता खत्म होने के साथ ही कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच का समन्वय, परीक्षा प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और शोध गतिविधियों पर बुरा प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है। आंदोलन के तहत 5 से 8 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर विरोध जताने और 10 अगस्त को सामूहिक हड़ताल कर विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने की जानकारी दी गई है। इस दौरान मगध प्रक्षेत्र के संयुक्त सचिव डॉ. शेखर सहित शिक्षक संघ सचिव डॉ. संजय कुमार, संयुक्त सचिव डॉ. एसएन प्रभाकर, कार्यकारिणी सदस्य डॉ. पूनम कुमारी, भोला शंकर बरनबाल सहित सभी शिक्षक और कर्मचारी शामिल रहे। (हिसुआ से उदय कुमार सिन्हा)


