सवर्ण एकता मंच ने यूजीसी कानून के विरोध में भरी हुंकार
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मऊ, संवाददाता। आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा, यूजीसी के वर्ष 2026 के नवीन प्रावधानों की समीक्षा एवं वापसी, एससी/एसटी अधिनियम के कथित दुरुपयोग पर प्रभावी रोक, सवर्ण/सामान्य वर्ग आयोग के गठन तथा ईडब्ल्यूएस व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुक्रवार को कलक्ट्रेट परिसर स्थित धरना स्थल पर सवर्ण एकता मंच के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। धरना-प्रदर्शन के बाद मंच की ओर से राष्ट्रपति को संबोधित पांच सूत्री मांग-पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया। प्रदर्शन के अंत में सवर्ण एकता मंच के प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे इस आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप देने के लिए बाध्य होंगे।
धरना प्रदर्शन के संयोजक विजय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि यूजीसी का यह नया कानून सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षाविदों के हितों के खिलाफ है। इससे शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन पैदा होगा और योग्य अभ्यर्थियों के अवसरों को सीमित किया जाएगा। अध्यक्षता करते हुए ऋषिकेश पांडे ने कहा कि यूजीसी के नए प्रावधान और आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था से सवर्ण समाज के मेधावी छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है। योग्यता के बावजूद उन्हें उच्च शिक्षा और नौकरियों में अवसर नहीं मिल पा रहा है। परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष पंडित अजीत कुमार पाण्डेय ने कहा कि आरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिए, न कि जातिगत। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा का हनन हो रहा है। एक तरफ मेधावी छात्र 90 प्रतिशत अंक लाकर भी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं, वहीं कम अंक वाले छात्रों को आरक्षण के नाम पर प्रवेश मिल जाता है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। संचालन करते हुए संतोष सिंह ने बताया कि मांग-पत्र में आरक्षण व्यवस्था की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक प्रभावशीलता की व्यापक और समयबद्ध समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय आयोग गठित करने की मांग की गई। मंच ने कहा कि जरूरतमंद लोगों तक सरकारी अवसरों का वास्तविक लाभ पहुंचाने के लिए आर्थिक स्थिति, पारिवारिक आय, संपत्ति तथा सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन जैसे व्यावहारिक मानकों को भी समीक्षा का आधार बनाया जाना चाहिए। मंच ने वर्ष 2026 में यूजीसी से संबंधित नवीन नियमों एवं प्रावधानों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों में प्रवेश, नियुक्ति और शैक्षणिक अवसरों में पारदर्शिता, योग्यता तथा समान अवसर सुनिश्चित होना चाहिए। किसी भी प्रावधान से यदि किसी वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ असमानता उत्पन्न होती है तो उसमें आवश्यक संशोधन अथवा उसे निरस्त करने की मांग की गई। मांग-पत्र में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के संरक्षण के लिए बनाए गए कानूनों की मूल भावना का सम्मान करते हुए उनके संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी एवं निष्पक्ष जांच तंत्र विकसित करने की मांग की गई। सवर्ण/सामान्य वर्ग के गरीब किसान, मजदूर, बेरोजगार युवा, विद्यार्थी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र एवं राज्यों में सवर्ण/सामान्य वर्ग कल्याण आयोग अथवा कल्याण बोर्ड गठित करने की मांग भी उठाई गई। इसके अलावा ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र की वैधता और प्रक्रिया को सरल एवं व्यावहारिक बनाने, पात्र अभ्यर्थियों को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ आयु सीमा में उचित छूट समेत अन्य न्यायसंगत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। धरना-प्रदर्शन में ऋषिकेश मिश्रा, परमात्मा सिंह, रामकृपाल सिंह, आदर्श पांडेय, रमन पाण्डेय, मुरली मनोहर पाण्डेय, के के पांडेय, घोसी से हंसनाथ तिवारी, कृपाशंकर सिंह, डॉ.नागेंद्र सिंह, अभिषेक सिंह और नंदकिशोर, कोपागंज क्षेत्र से आशीष राय, बबलू राय, छट्टू सिंह, धनंजय सिंह, बृजेंद्र सिंह और गोल्डन सिंह, मधुबन क्षेत्र से देवेंद्र सिंह, सत्येंद्र सिंह, विजय शंकर सिंह, धनंजय सिंह प्रधान, रंजीत सिंह, प्रभाकर सिंह और विद्यासागर सिंह, मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र से अरविंद सिंह, उमाशंकर सिंह, बृज बिहारी सिंह, सतीश सिंह, सूर्यभान सिंह, नागेंद्र सिंह, बुच्ची सिंह, भीष्म सिंह, माखन सिंह और बबलू सिंह, परदहा क्षेत्र से बलवंत सिंह, जितेंद्र सिंह (अध्यक्ष, करणी सेना), बलवंत सिंह अहिलाद, नंदकिशोर सिंह, पवन पांडेय, रामकरण सिंह, राघवेंद्र, अतुल, यशवंत सिंह, राजू सिंह रकौली, सुनील सिंह, रणबीरपुर, अमरजीत सिंह ‘संत’ और बृजेश सिंह हरपुर समेत अन्य लोग मौजूद रहे।-----------------------------------------


