विभिन्न मुद्दों को लेकर वाम दलों ने निकाला विरोध मार्च
लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमलों, महिला हिंसा, और दलित उत्पीड़न के खिलाफ वामपंथी दलों द्वारा सोमवार को चकिया में एक विरोध मार्च निकाला गया। मार्च के बाद 12 सूत्रीय ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया। नेताओं ने न्याय की मांग और बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने का आह्वान किया।

चकिया, हिन्दुस्तान संवाद। लोकतांत्रिक अधिकारों पर कथित हमलों, बुलडोजर कार्रवाई, महिला हिंसा, दलित उत्पीड़न तथा विभिन्न जन मुद्दों को लेकर वामपंथी दलों के संयुक्त राज्यव्यापी आह्वान पर सोमवार को चकिया में विरोध मार्च निकाला गया। काली मंदिर पोखरे से उपजिलाधिकारी कार्यालय तक निकाले गए मार्च के बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित 12 सूत्रीय ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा गया। सभा को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा भाकपा (माले) लिबरेशन के नेताओं ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सहित देश में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
वाम नेताओं ने मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय दिलाने, महिला हिंसा और दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने, अयोध्या चंदा चोरी प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों पर कार्रवाई करने, बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने तथा पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की मांग की।इसके साथ ही नीट पेपर लीक प्रकरण में जवाबदेही तय करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने की भी मांग उठाई गई। विरोध मार्च में जिला सचिव शंभूनाथ यादव, भाकपा (माले) के जिला सचिव अनिल पासवान, किसान सभा के जिलाध्यक्ष लालचंद यादव, खेग्रामस के जिला सचिव रामायण राम, एडवा नेत्री लालमणि विश्वकर्मा, आइसा कार्यकर्ता क्रांति पासवान, आरवाईए की राज्य परिषद सदस्य सुनैना कुमारी, एपवा की जिला परिषद सदस्य बैजंतीमाला, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामनिवास पांडेय, नारद मुनि विश्वकर्मा, जयनाथ राम सहित बड़ी संख्या में वामपंथी कार्यकर्ता मौजूद रहे।


