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BJP in Kerala: मस्जिदों में सजदा, चर्च में जलाई मोमबत्ती; सुरेश गोपी ने ऐसे खिलाया केरल में कमल

केरल में सुरेश गोपी और उनकी पार्टी भाजपा की पहली जीत के पीछे कई कारण छिपे हैं। मलयालम फिल्म में सुरेश गोपी चर्चित चेहरा हैं। महिला मतदाताओं और ईसाई समुदाय के एक वर्ग का उन्हें समर्थन प्राप्त है।

BJP in Kerala: मस्जिदों में सजदा, चर्च में जलाई मोमबत्ती; सुरेश गोपी ने ऐसे खिलाया केरल में कमल
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Himanshu Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Wed, 05 Jun 2024 11:11 AM
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार औप अभिनेता से नेता बने सुरेश गोपी के 74,686 मतों के अंतर से त्रिशूर लोकसभा सीट जीतने के साथ भाजपा ने मंगलवार को केरल में अपना खाता खोल लिया। आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गोपी ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के उम्मीदवार वी एस सुनील कुमार को एक दिलचस्प मुकाबले में हराया। गोपी को कुल 4,12,338 वोट मिले जबकि सुनील कुमार को 3,37,652 मत मिले। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद के. मुरलीधरन 3,28,124 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में भाजपा को 37.8% वोट मिले, जबकि एलडीएफ और यूडीएफ को 30.95% और 30.08% वोट मिले।

गोपी 2019 के लोकसभा चुनाव में त्रिशूर से हार गये थे। उन्हें 2021 के विधानसभा चुनाव में भी शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

केरल में भाजपा की एंट्री के क्या हैं कारण?
केरल में सुरेश गोपी और उनकी पार्टी भाजपा की पहली जीत के पीछे कई कारण छिपे हैं। मलयालम फिल्म में सुरेश गोपी चर्चित चेहरा हैं। महिला मतदाताओं और ईसाई समुदाय के एक वर्ग का उन्हें समर्थन प्राप्त है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनका तालमेल भी अच्छा है। साथ ही पिछले पांच वर्षों में केरल में भाजपा का संगठन काफी मजबूत हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषक और लेखक सनीकुट्टी अब्राहम ने कहा, "सभी ने देखा कि कैसे प्रधानमंत्री सुरेश गोपी की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए त्रिशूर आए। दोनों के बीच अच्छा तालमेल है। गोपी केरल में काफी लोकप्रिय हैं। महिला मतदाताओं के बीच उनका प्रभाव है।''

सुरेश गोपी ने 250 से अधिक मलयालम फिल्मों में अभिनय किया है। अपनी एक्शन फिल्मों पुलिस ऑफिसर की भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पहली बार त्रिशूर में तब अपनी छाप छोड़ी जब 2019 में चुनाव लड़े। हालांकि उस चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रहे। भाजपा के वोट-शेयर को 11% से 28% तक ले जाने में जरूर कामयाब रहे। 

इसके दो साल बाद 2021 में उन्होंने त्रिशूर से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन फिर तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि, एलडीएफ और यूडीएफ को कड़ी टक्कर दी थी। वह 2016 में पीएम मोदी के आग्रह पर भाजपा में शामिल हुए थे।

अपनी हार के बावजूद वह भाजपा का काम करते रहे और बेस वोट की आवाज बुलंद करते रहे। उन्होंने पार्टी द्वारा चलाए गए आंदोलनों में भाग लिया। करुवन्नोर सहकारी बैंक धोखाधड़ी मामले में भाजपा द्वारा आयोजित आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस घोटाले में कई वरिष्ठ सीपीएम नेता आरोपी हैं। 

मस्जिदों में भी गए सुरेश गोपी
केरल में भी अल्पसंख्यकों द्वारा भाजपा को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है, लेकिन सुरेश गोपी ने अपनी छविए एक ऐसे नेता की बनाए रखी जो सभी समुदायों के लिए स्वतंत्र रूप से सुलभ हैं। चुनावी अभियान के दौरान उन्होंने मंदिरों के अलावा चर्चों और मस्जिदों का भी दौरा किया। मंगलवार को अपनी जीत के बाद गोपी ने कहा कि वह उनका समर्थन करने वाले 'धर्मनिरपेक्ष' मतदाताओं को 'सलाम' करते हैं। 

उन्होंने कहा, "इन धर्मनिरपेक्ष मतदाताओं ने जाति या राजनीतिक संबद्धता के चश्मे से नहीं देखा है। धर्मनिरपेक्ष मतदाताओं को गुमराह करने के लिए लोगों के कई वर्गों द्वारा कई प्रयास किए गए। उन्होंने मुझे चुनाव से हटने के लिए मजबूर करने के लिए मेरी आत्मा को भी चोट पहुंचाई है। भगवान ने मुझे उनके जवाब के रूप में इस जीत से नवाजा है।"