पोर्टल की दिक्कतों के कारण सैकड़ों कर्मचारियों की पदोन्नति फंसी
जूनियर इंजीनियर, आर्किटेक्ट, ड्राफ्टमैन की पदोन्नति फंसी लखनऊ। विशेष संवाददाता मानव सेवा संपदा पोर्टल के

जूनियर इंजीनियर, आर्किटेक्ट, ड्राफ्टमैन की पदोन्नति फंसी लखनऊ। विशेष संवाददाता
पदोन्नति प्रक्रिया में अड़चन
मानव सेवा संपदा पोर्टल के डीपीसी मॉड्यूल में दिव्यांग कर्मचारियों का ब्योरा दर्ज करने की व्यवस्था न होने से कर्मचारियों की प्रोन्नति नहीं हो पा रही है जबकि मुख्य सचिव ने आदेश दिए थे कि 30 जून तक प्रोन्नति प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के अध्यक्ष एनडी द्विवेदी के मुताबिक जूनियर इंजीनियर ही नहीं, अन्य विभागों में भी डीपीसी इन्हीं दिक्कतों के कारण नहीं हो रही है। रिक्त पदों के सापेक्ष दिव्यांगजन के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण है। पोर्टल पर ब्योरा दर्ज न होने के कारण इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। इसी दिक्कतों के चलते अब तक डीपीसी नहीं हो पायी। संगठन ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से भी की है।
मुख्य सचिव के आदेश
संघ के मीडिया प्रभारी मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक मुख्य सचिव ने 14 मई को आदेश दिया था कि 30 जून तक प्रोन्नति प्रक्रिया पूरी कर लेनी है। यह भी स्पष्ट कर दिया था कि इस बार मानव संपदा पोर्टल पर विकसित डीपीसी मॉड्यूल के हिसाब से की जाएगी। विभागाध्यक्ष ने भी प्रमुख सचिव को सूचित किया लेकिन अब तक कोई व्यवस्था नही हो पायी। प्रोन्नति में कुल रिक्त पदों के सापेक्ष डेढ़ गुना कर्मचारियों की वरिष्ठता पर विचार किया जाता है। इसमें दिव्यांग कर्मचारियों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण है। पोर्टल में ही इन कर्मचारियों का ब्योरा दर्ज करने की सुविधा नहीं होने के कारण अब तक डीपीसी नहीं हो पायी।
डीपीसी की लंबी प्रक्रिया
संघ के अध्यक्ष एनडी द्विवेदी के मुताबिक डीपीसी की लंबी प्रक्रिया है। शासनादेश के हिसाब से 30 जून तक प्रोन्नति हो जानी चाहिए थी लेकिन अब तक पात्रता सूची ही तैयार नहीं हो पायी। जूनियर इंजीनियर की प्रोन्नति लोकसेवा आयोग से होती है। विभाग प्रस्ताव शासन को भेजता है और शासन आयोग को। आयोग अंतिम प्रोन्नति सूची जारी करता है। प्रदेश के सैकड़ों जूनियर इंजीनियर, सहायक अभियंता पद पर प्रोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। विभाग, शासन और एनआईसी एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। इंजीनियर एनडी द्विवेदी के मुताबिक पोर्टल में दिव्यांग का मॉड्यूल न होने के कारण सभी विभागों में प्रोन्नति फंसी हुई है। बगैर आरक्षण दिए कैसे डीपीसी का प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है। जब विभाग प्रस्ताव ही तैयार नहीं कर पा रहे हैं तो डीपीसी की बैठक भी नहीं हो सकती।


