शकरकंद की नर्सरी तैयार करें,उपज आमदनी में इजाफा होगा

हिन्दुस्तान, झांसी
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किसान शकरकंद में पैसा कमाना चाहते हैं तो तैयार रहें और नर्सरी जून-जुलाई में बनाएं। सितंबर से अक्टूबर में रोपाई करें। अच्छी नर्सरी से स्वस्थ पौधे मिलते हैं, जिससे अधिक उत्पादन संभव है। रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ डॉ. बृज बिहारी शर्मा ने वैज्ञानिक विधि की सलाह दी है।

शकरकंद की नर्सरी तैयार करें,उपज आमदनी में इजाफा होगा

झांसी। किसान यदि शकरकंद में पैसा कमाना चाहते है तो इसके लिए तैयार रहें और नर्सरी जून जुलाई में बनाएं। सितम्बर से अक्टूबर तक इसकी रोपाई खेतों में हो सकती है। जिसके बाद किसान अच्छा दाम कमा सकते है। इसकी बाजार में डिमांड भी बनी रहती है और जब यह बाजार में आती है तब त्योहारों की अधिकता में इसका खूब प्रयोग होता। रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के सब्जी वैज्ञानिक डॉ. बृज बिहारी शर्मा ने वैज्ञानिक विधि से शकरकंद की नर्सरी तैयार करने की सलाह दी है।

नर्सरी बनाने की विधि

डॉ. शर्मा ने बताया कि शकरकंद एक पौष्टिक एवं लाभकारी कंदीय जड़ वाली सब्जी है। इसकी खेती देश के बहुतायत राज्यों में बड़े पैमाने पर की जाती है। बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए स्वस्थ एवं रोगमुक्त नर्सरी तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। शकरकंद की नर्सरी जून से जुलाई माह में तैयार की जाती।

मुख्य खेत में रोपाई

जिससे स्वस्थ एवं रोगमुक्त पौधे उपलब्ध हो सकें। इस समय तैयार की गई नर्सरी से पर्याप्त मात्रा में बेल (वाइन) विकसित हो जाती है, जिसे मुख्य खेत में रोपाई के लिए उपयोग किया जाता है। शकरकंद की मुख्य खेत में रोपाई सितंबर से अक्टूबर माह के बीच की जाती है। इस समय रोपाई करने से फसल की वृद्धि अच्छी होती है तथा अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। शकरकंद की नर्सरी उन्नत तरीके से तैयार करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती।

उपज और गुणवत्ता

उपज और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। शकरकंद का प्रवर्धन मुख्यत: बेल की कटिंग (स्लिप्स) द्वारा किया जाता है। इसके लिए सबसे पहले स्वस्थ मातृ कंदों से नर्सरी तैयार की जाती है। नर्सरी हेतु ऐसी भूमि का चयन करना चाहिए जहाँ जल निकास की उचित व्यवस्था हो तथा मिट्टी बलुई दोमट और कार्बनिक पदार्थों से भरपूर हो। लगभग 1 मीटर चौड़ी एवं 20-25 सेंटीमीटर ऊँची उठी हुई क्यारियाँ तैयार करनी चाहिए।

किसान के लिए सलाह

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नर्सरी के लिए 100-150 ग्राम वजन वाले स्वस्थ, रोग एवं कीटमुक्त कंदों का चयन करना चाहिए। एक हेक्टेयर क्षेत्र की रोपाई के लिए लगभग 8-10 क्विंटल मातृ कंद पर्याप्त होते हैं। उपचारित कंदों को क्यारियों में 5-7 सेंटीमीटर दूरी पर लगाकर ऊपर से मिट्टी एवं बालू की पतली परत चढ़ा दी जाती। लगभग 25-30 दिनों बाद कंदों से स्वस्थ बेलें निकलने लगती हैं। जब बेलें 20-30 सेंटीमीटर लंबी हो जाएँ और उनमें 5-6 गांठें विकसित हो जाएं।

सामान्य प्रश्न

शकरकंद की नर्सरी कब बनानी चाहिए?
शकरकंद की नर्सरी जून से जुलाई माह में बनानी चाहिए।

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