निजी अस्पतालों में आयुष्मान लाभार्थियों को उपचार नहीं मिलने मरीज परेशान
फरीदाबाद में निजी अस्पतालों ने आईएमए के आह्वान पर आयुष्मान लाभार्थियों का उपचार नहीं किया। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कई सर्जरी रद्द हुईं। आयुष्मान योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को निशुल्क उपचार मिलता है, लेकिन लंबे समय से अस्पतालों का उपचार राशि का भुगतान नहीं हुआ है।

फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। जिले के निजी अस्पतालों ने आईएमए के आह्वान पर मंगलवार को आयुष्मान लाभार्थियों का उपचार नहीं किया। इससे आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी हुई।
समस्या का विवरण
स्मार्ट सिटी में करीब 20 सर्जरी रद्द की गईं, जो आयुष्मान योजना के तहत होनी थीं। अंत में थक-हारकर मरीज बीके अस्पताल पहुंचे। यहां उन्हें पहले रजिस्ट्रेशन काउंटर और फिर ओपीडी की लंबी कतार में लगने के बाद उपचार मिला। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्हें निजी अस्पताल में उपचार नहीं मिलने पर घर वापस लौटना पड़ा। वे बुधवार को निजी अस्पताल जाकर उपचार कराएंगे।
आयुष्मान योजना की जानकारी
बता दें कि आयुष्मान योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों का सरकार के पैनल में शामिल अस्पतालों में निशुल्क उपचार होता है और उसका भुगतान सरकार करती है। जिले में कुल 39 अस्पताल पैनल में हैं। इनमें से 16 निजी अस्पताल हैं।
इन सभी अस्पतालों का लंबे समय से आयुष्मान योजना के तहत उपचार कराने वाले मरीजों के इलाज का भुगतान नहीं किया गया है। आईएमए के अनुसार, जिले के विभिन्न अस्पतालों का करीब 22 करोड़ रुपये सरकार पर उपचार राशि के रूप में बकाया है। इसके भुगतान को लेकर स्वास्थ्य निदेशालय एवं सरकार के प्रतिनिधियों से कई बार बातचीत हो चुकी है। बातचीत के दौरान जल्द भुगतान का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन वह आश्वासन वास्तविकता में परिवर्तित नहीं होता। यह एक बड़ा कारण है कि जिले के अस्पतालों का अब आयुष्मान योजना से मोहभंग हो गया है।
सेवाओं का ठप होना
इस वर्ष पांचवीं बार बंद की सेवा
आयुष्मान योजना के तहत भुगतान नहीं होने पर निजी अस्पताल पहले भी कई बार लाभार्थियों का उपचार बंद कर चुके हैं। इस वर्ष में ही चौथी बार आयुष्मान लाभार्थियों को सरकार द्वारा समय पर भुगतान नहीं किए जाने की वजह से लाभ से वंचित रहना पड़ा है। इस साल तीन फरवरी, 20 अप्रैल और पांच जून को आयुष्मान लाभार्थियों को परेशान होना पड़ा था। आमजन को निजी अस्पतालों के महंगे उपचार से राहत देने के लिए शुरू की गई आयुष्मान योजना अब उनके लिए सिरदर्द बनती जा रही है।
भविष्य की योजनाएं
16 सितंबर से अनिश्चितकाल के लिए बंद होंगी सेवाएं
आईएमए के आयुष्मान विंग के चेयरमैन डॉ. सुरेश अरोड़ा ने बताया कि मंगलवार को 24 घंटे के लिए सेवाएं बंद की गई थीं। यदि सरकार 15 सितंबर तक भुगतान नहीं करती है तो 16 सितंबर से अनिश्चितकाल के लिए सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। इस दौरान यदि मरीजों को कोई परेशानी होती है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं सरकार की होगी। प्रदेश के करीब 650 अस्पतालों का 1200 करोड़ रुपये बकाया है।
अस्पतालों की घटती संख्या
सरकार द्वारा निजी अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं किए जाने से उनका मोहभंग होता जा रहा है। दो वर्ष पूर्व तक योजना में करीब 30 निजी अस्पताल शामिल थे, लेकिन लगातार इनकी संख्या कम होती जा रही है। अब इनकी संख्या घटकर 16 रह गई है। इनमें से भी कुछ अस्पताल आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर निकलने की तैयारी में हैं।
रोगियों की समस्याएं
योजनाएं आमजन की सहूलियत के लिए बनती हैं, लेकिन लचर व्यवस्था ने उसी योजना को बोझ बना दिया है। आयुष्मान योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा। पहले निजी अस्पताल गया था। वहां मना किए जाने के बाद बीके अस्पताल आया। यहां पर दवा नहीं मिली।
-असलम, बड़खल
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पिछले कुछ समय से बीमार चल रहा हूं। छोटा-सा ऑपरेशन होना है, लेकिन एक दिन की हड़ताल के चलते वापस लौटा दिया। बीके अस्पताल पहुंचा तो यहां पर भी दवा पूरी नहीं मिली। पहले भी इस तरह की परेशानी हुई थी।
-श्याम लाल, एसजीएम नगर


