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विशेष साक्षात्कार: PM मोदी बोले- मुंह की खाएगा महागठबंधन, जनता ऐसे गठजोड़ को पहले भी सिखा चुकी सबक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट मानना है कि महागठबंधन सत्ता के लिए असमान विचारधाराओं का गठजोड़ है। इस तरह के गठबंधन को मुंह की खानी पड़ेगी। पहले भी ऐसे गठबंधनों को जनता सबक सिखा चुकी है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि 2019 में भी जनता इनसे गठबंधन नहीं करेगी।  ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ को दिए ईमेल साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कहा, हताश और निराश लोगों के इस महागठबंधन के पास कोई विचारधारा और सिद्धांत नहीं है। देश की तरक्की और भविष्य की कोई योजना भी नहीं है। महागठबंधन एक सियासी शिगूफा है जो हमेशा असफल रहा है। मोदी ने कहा, देश की जनता ने राष्ट्रीय हितों को हमेशा ऊपर रखा है। मुझे भरोसा है कि वह राष्ट्रीय हितों की कीमत पर किसी ऐसे समूह से समझौता नहीं करेगी, जिनका एकमात्र एजेंडा ‘मोदी हटाओ’ हो। 

देश की छवि सुधरी: प्रधानमंत्री ने कहा, कोई इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि केंद्र में हमारी सरकार आने के बाद दुनिया की नजर में भारत की छवि सुधरी है। यह लंबे समय बाद हुआ है कि केंद्र में काम करने वाली एक मजबूत और स्थिर सरकार है। मोदी ने कहा, राजनीतिक पंडित 2014 के आम चुनाव में पूरी तरह से गलत साबित हुए थे।  

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विदेश नीति के केंद्र में भी विकास: मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने विदेश नीति के केंद्र में भी विकास कार्यों को रखा है। इसमें भारतीयों का कल्याण और दुनिया की साझा प्रगति शामिल है। उन्होंने कहा, विकास के लिए कूटनीति के प्रयोग ने भारत बदलने के एजेंडे में योगदान दिया है। यही वजह है कि पिछले चार वर्षों में देश में 200 अरब डॉलर से अधिक निवेश लाया जा चुका है।

एक साल में 70 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार
रोजगार के सवाल पर मोदी ने कहा, पिछले साल औपचारिक क्षेत्र में 70 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला। यह आंकड़ा सरकार द्वारा ईपीएफओ के डाटा के अध्ययन पर आधारित है। सितंबर 2017 से अप्रैल 2018 के बीच ही 45 लाख से ज्यादा रोजगार का सृजन हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा, निहित राजनीतिक स्वार्थ के चलते कई लोग कह रहे हैं कि देश में रोजगार नहीं हैं। दरअसल, नौकरी और रोजगार से जुड़ा सुव्यवस्थित डाटाबेस नहीं होने के कारण लोग ऐसा कह रहे हैं। 

आर्थिक भगोड़ों को हर हाल में देश वापस लाएंगे, यह कहना है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का। विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक कानून बनने पर एक सर्वव्यापी तंत्र बनाने में मदद मिलेगी। इससे भगोड़ों को देश वापस लाने और न्यायिक प्रक्रिया में भाग लेने पर मजबूर किया जा सकेगा। 

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-विदेश नीति के बारे में अहम बात यह है कि बीते चार वर्षों में हमने उन देशों के साथ संबंधों को भी आगे बढ़ाया जिनसे मतभेद रहे हैं। ऐसे में आप हमारी विदेश नीति का किस तरह से वर्णन करेंगे। 

मेरी सरकार की विदेश नीति के केंद्र में विकास कार्य हैं, जो भारतीयों के कल्याण और दुनिया में प्रगति और समृद्धि की वकालत करती है। विकास की कूटनीति के जरिए हमने उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और व्यवसायों से पिछले चार वर्षों में 200 अरब डॉलर का विदेशी निवेश हासिल किया है। इससे आर्थिक विकास को तेजी से बढ़ाने, नए कारखाने स्थापित करने, अतिरिक्त सेवाएं और लाखों रोजगार पैदा करने में मदद मिलेगी। हमने अभूतपूर्व राजनयिक पहुंच से मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्मार्ट सिटी, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और कई राष्ट्रीय योजनाओं के लिए सैकड़ों साझेदारियां की हैं। इन योजनाओं के जरिए हम 2022 तक न्यू इंडिया बनाएंगे। 
    
अस्थिर अंतरराष्ट्रीय बाजार के बावजूद हम नई वैश्विक ऊर्जा साझेदारी के माध्यम से आपूर्ति और भंडार के नए स्रोत बना रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गज रूस, यूएई और सऊदी अरब ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 35 अरब डॉलर का निवेश किया है।  हमारी सक्रिय विदेश नीति का मानवीय चेहरा भी है। भारत ने दुनियाभर में मुश्किल में फंसे अपने हजारों नागरिकों को सुरक्षित निकालने का काम किया है। 

- आप टकराव से कैसे निपटते हैं? मसलन, आप रूस से हथियारों की खरीद करने के लिए अमेरिका को कैसे मनाते हैं?  
आपने बहुत ही उपयुक्त सवाल पूछा है। यह गतिविधि भारत के प्रति बढ़ते विश्वास और एक मजबूत और स्थिर सरकार की नीतियों में आत्मविश्वास को दिखाता है। कुछ ऐसा जो तीन दशकों के बाद भारत में हुआ है। अमेरिका और रूस दोनों भारत के लंबे समय से रणनीतिक साझेदार हैं। हमारे सभी क्षेत्रों में रूस के साथ संबंध हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्रों सहित अमेरिका के साथ हमारे संबंध में एक बड़ा परिवर्तन आया है। दोनों देश सुरक्षा समेत हमारे सभी हितों को समझते हैं।

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- क्या आपको लगता है कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक देश छोड़कर भागे कर्जदारों को वापस लाने में सक्षम है?
यह कानून ऐसे आर्थिक अपराधियों के लिए है जो वर्षों से देश की व्यवस्था में खामियों का फायदा उठाते रहे हैं और न्यायिक प्रक्रिया से बच जाते हैं। इस नए कानून से सर्वव्यापी तंत्र बनाने में मदद मिलेगी। जो इन आर्थिक अपराधियों को देश वापस लाने और न्यायिक प्रक्रिया में भाग लेने पर मजबूर करेगा। इस कानून का असर भी दिखाई देने लगा है। ऐसे ही एक केस में पीएमएलए के तहत 800 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। वहीं दूसरे केस में पीएमएलए के तहत ही 3500 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। 

- आपने आमतौर पर अभियान का शुभारंभ करने के लिए स्वतंत्रता दिवस का एक मंच के रूप में उपयोग किया है, जिनमें सबसे उल्लेखनीय स्वच्छ भारत अभियान है। क्या हम इस साल कुछ इसी तरह की उम्मीद कर सकते हैं? 
आप सही हैं। 15 अगस्त और 26 जनवरी दोनों महत्वपूर्ण दिन हैं और प्रमुख योजनाओं की घोषणा के लिए इनका इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, मैं इस विचार से सहमत नहीं हूं कि यह दिन अभियान लांच करने का एक मंच है। स्वतंत्रता दिवस हमारी आजादी का त्योहार है। यह उन लोगों को याद करने का दिन है जिन्होंने हमारी आजादी के लिए अपना बलिदान दिया और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का वचन लेने का दिन है। जिस आजादी का हम आनंद ले रहे हैं उसके लिए उन्हें धन्यवाद देने और आभार जताने का दिन है। और यह महसूस करने का दिन भी है कि हम आजादी का जिम्मेदारी से आनंद लें। 
 
- आप एक साथ चुनाव के प्रबल समर्थक हैं। लेकिन सभी राज्य इसका समर्थन नहीं कर रहे हैं। क्या आप सोचते हैं कि इसे अमल में लाया जा सकता है?
हाल के महीनों में इस विषय पर काफी बहस हुई है। देशभर में इस महत्वपूर्ण विषय पर हो रही बहस का मैं स्वागत करता हूं। अनुभव 
बताता है कि लगातार चुनाव से सरकारी कामकाज और विकास प्रभावित होता है। चुनाव बहुत खर्चीला होता है। और लगातार चुनाव से सीमित संसाधन वाले देश की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। 

- हाल ही में, महिलाओं की सुरक्षा और उनके सशक्तीकरण के संबंध में प्रश्न उठाए गए हैं। सरकार इस मुद्दे का हल कैसे निकालेगी?
यदि महिलाएं विकास प्रक्रिया में पूर्ण भागीदार नहीं हैं तो कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता। मुझे लगता है कि महिलाओं को सशक्त करने के लिए हमें अपनी सोच में बदलाव करना होगा। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार है कि हमारे पास सुरक्षा पर मंत्रिमंडल समिति में दो महिलाएं हैं- विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री। महिलाओं को पहली बार भारतीय वायु सेना में लड़ाकू पायलटों के रूप में शामिल किया गया है। तीन तलाक बिल भारत में मुस्लिम महिलाओं के साथ अरसे से जारी अन्याय को खत्म करने के लिए लाया गया है। बिल के जरिए तीन तलाक और निकाह हलाला को गैर कानूनी घोषित किया गया है।  

-जीएसटी और आईबीसी कई दृष्टिकोणों में से दो सबसे बड़े सुधार हैं। अगला बड़ा सुधार क्या होगा? 
मुझे खुशी है कि आपने इन दो सुधारों को ‘बड़े सुधार’ के रूप में गिना है। हमने कई और सुधार किए हैं जिनसे हमारी अर्थव्यवस्था को अत्यधिक लाभ पहुंचा है। सरकार ने सीपीएसई के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलने का एक बड़ा फैसला लिया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक संपत्तियों का कुशल प्रबंधन करने से है। विनिवेश रणनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। हालांकि, मेरी सरकार के लिए सुधार प्रक्रिया एक निरंतरता है।  

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-क्या आपको लगता है कि व्यापारी समुदाय में डर है जो किसी भी तरह निवेश करने की अपनी प्रवृत्ति को रोक रहा है?
यह सरकार कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। साथ ही मेरी सरकार बेईमान तत्वों को सजा दिलाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस सरकार का जोर प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर है जिससे कि कंपनी के गठन, निदेशक की नियुक्ति, कर का भुगतान और जीएसटी भुगतान में आसानी हो। हम कारोबारी सुगमता में 142वें स्थान से 100वें पर पहुंच गए हैं। जो यह दर्शाता है कि हम कंपनियों को बेहतर माहौल देने में सफल रहे हैं। 
 
-बैंकों के एनपीए और फंसे हुए कर्ज को आप किस तरह से देखते हैं?
यूपीए-2 के समय बड़ी मात्रा में कंपनियों को कर्ज दिए गए। उस समय सिर्फ फोन आने पर ही बैंक कर्ज दे देते थे। इस दौरान अधिकांश मामलों में बिना किसी गहन जांच के ये कर्ज दिए गए। आंकड़ों से पता चलता है कि 2008 से 2014 के दौरान एनपीए (फंसे हुए कर्ज) में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई। हमारी सरकार जब सत्ता में आई तो इन तथ्यों का पता चला। हमने बैंकिंग प्रणाली को बेहतर करने के लिए मजबूती से काम किया।

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-बाहर से, ऐसा लगता है कि भारत-चीन संबंधों में डोकाला गतिरोध के बाद गर्मजोशी आई है। यह किस तरह हासिल किया गया है? 
वास्तविक नियंत्रण रेखा के बारे में अलग-अलग धारणाओं के कारण सीमावर्ती इलाकों में कभी-कभार घटनाएं होती रही हैं। हालांकि दोनों देश हमेशा बातचीत के साथ-साथ राजनयिक माध्यमों के जरिये इन घटनाओं को शांतिपूर्वक हल करने में कामयाब रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले चार दशक में भारत-चीन सीमा पर एक भी गोली नहीं चली है। सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखी गई है। इससे पता चलता है कि हम दोनों परिपक्व देश हैं। हम हमारे मतभेदों को शांतिपूर्वक हल करने में सक्षम हैं।

भारत और चीन दोनों ईस्ट एशिया समिट, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन, जी-20 और अन्य कई बहुपक्षीय तंत्रों के सदस्य हैं। पर्यावरण से लेकर वैश्विक शासन के संस्थानों में सुधार से लेकर व्यापार तक वैश्विक महत्व के कई मुद्दे हैं, जहां भारत और चीन के सहयोग और नेतृत्व का लंबा इतिहास है। बीते चार साल में मैंने राष्ट्रपति शी जिर्नंपग से कई बार मुलाकात की है। हमने अप्रैल 2018 में वुहान में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के रूप में हमारी भागीदारी में एक नया आयाम जोड़ा। इसने हमें एक-दूसरे र्की ंचताओं को समझने के लिए एक बहुत ही स्वतंत्र और स्पष्ट माहौल में बातचीत करने की इजाजत दी। हम बहुपक्षीय शिखर सम्मेलनों के दौरान भी नियमित रूप से बैठक कर रहे हैं। 

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-पिछले चार सालों में आपको किस उपलब्धि ने गौरवान्वित किया और किस  पर अफसोस हुआ? 
मैं उपलब्धियों को अपना नहीं मानता। यह हमारे सवा सौ करोड़ देशवासी हैं जिन्होंने मुझे देश की सेवा करने का अवसर दिया है। यह मेरे सवा सौ करोड़ देशवासियों का प्रयास है। उन्होंने इस देश को बेहतर स्थान बनाने के लिए अपने प्रयासों और दृष्टि को पंख दिए हैं। यह मुझे बहुत संतुष्टि देता है जब मैं देखता हूं कि आज दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय लोगों को उचित मान्यता मिल रही है। यह उपलब्धि सभी से परे है। 

-आप भारत-प्रशांत क्षेत्र में और उभरते हुए क्वाड ग्रुपिंग में भारत की क्या भूमिका देखते हैं?
मैं जून 2018 में सिंगापुर में शांगरी-ला वार्ता के दौरान अपने मुख्य संबोधन में हिंद-प्रशांत के लिए भारत की दृष्टि का विस्तार से जिक्र कर चुका हूं। मैंने हिंद- प्रशांत के संबंध में हमारे दृष्टिकोण को लेकर हिंदी में ‘पांच एस’ अर्थात सम्मान, संवाद, सहयोग, शांति और समृद्धि का मंत्र दिया है। हमारी दृष्टि सकारात्मक और समावेशी दृष्टि है। यह किसी के खिलाफ नहीं है, न ही हम इस क्षेत्र पर हावी होने की कोशिश करते हैं।

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  • Web Title:Prime Minister Narendra Modi Interview With Hindustan times over many issues