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पहले से विराजित श्रीराम ने रामलला के लिए भेजा था उपहार, पीएम मोदी के हाथों में था खास तोहफा

22 जनवरी को राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने हाथों में एक टोकरी लेकर गर्भगृह पहुंचे थे। इसमें खास तोहफा था जो कि श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर से मिला था।

पहले से विराजित श्रीराम ने रामलला के लिए भेजा था उपहार, पीएम मोदी के हाथों में था खास तोहफा
Ankit Ojhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 23 Jan 2024 04:12 PM
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अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले ही राम मंदिर के लिए दान करने वाले लोगों का तांता लगा है। प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में शामिल होने पहुंचे अतिथि भी कुछ ना कुछ उपहार लेकर ही पहुंचे थे। वहीं अनुष्ठान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर ने हर किसी का ध्यान खींचा। जब वह अनुष्ठान संपन्न करवाने के लिए नंगे पांव ही मंदिर की ओर बढ़ रहे थे तो उनके हाथ में एक टोकरी थी। इसमें रामलला के लिए चांदी के छत्र के अलावा भी कुछ उपहार थे। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर प्रधानमंत्री ने रामलला को क्या भेंट किया था। 

प्रतिष्ठित श्रीराम ने भेजा था रामलला का उपहार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्राण प्रतिष्ठा से पहले 11 दिन के उपवास पर थे। इस दौरान वह रामायण काल से जुड़े कई स्थानों पर पहुंचे और वहां के मंदिरों में दर्शन किए. इसी क्रम में पीएम मोदी तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली स्थित श्रीरंगम मंदिर भी पहुंचे थे। इस मंदिर में शेष शैय्या पर विराजमान भगवान विष्णु के अलावा श्रीराम की भी प्रतिष्ठित प्रतिमा है। वहीं रामकथा से भी यह मंदिर जुड़ा हुआ है। यहीं पर भगवान श्री रंगनाथ की तरफ से पुजारियों ने पीएम मोदी को कुछ वस्त्र दिए थे। श्रीरंगनाथ स्वामी की तरफ से मिले यही उपहार प्रधानमंत्री ने रामलला को भेंट किए।

क्यों विशेष है रंगनाथ स्वामी मंदिर
कावेरी तट पर स्थिति इस मंदिर को दुनिया का सबसे बड़ा पूजनीय मंदिर माना जाता है। इस मंदिर में भगवान विष्णु, श्री राम, कृष्ण और लक्ष्मी जी की प्रतिमाएं हैं। 400 एकड़ में फैले मंदिर परिसर में दिवाली और कृष्ण जन्माष्टमी पर बड़ा उत्सव होता है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 9वीं सदी में गंग राजवंश के दौर में हुआ था। 

क्या कहती हैं जनश्रुतियां
जनश्रुतियों में कहा जाता है कि इशी जगह पर त्रेता युग में भगवान राम ने लंबा समय बिताया था। वहीं भगवान श्रीराम ने लंका से लौटते समय विभीषण को यहीं पर विष्णु रूप में दर्शन दिए थे। कहा जाता है कि यहां रंगनाथ के रूप में श्रीराम विराजमान हैं। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि यहां ऋषि गौतम का आश्रम हुआ करता था। गो हत्या का आरोप लगने के बाद उन्होंने यहीं पर आकर भगवान नारायण की तपस्या की। 

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