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महाराष्ट्र में 59 वर्ष के इतिहास में तीसरी बार लगाया गया राष्ट्रपति शासन

महाराष्ट्र में मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लगाया जाना राज्य के 59 वर्ष के इतिहास में पहली ऐसी घटना है जब विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक दलों के सरकार नहीं बना पाने के चलते अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल...

महाराष्ट्र में 59 वर्ष के इतिहास में तीसरी बार लगाया गया राष्ट्रपति शासन
एजेंसी ,मुम्बई।Wed, 13 Nov 2019 08:39 AM
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महाराष्ट्र में मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लगाया जाना राज्य के 59 वर्ष के इतिहास में पहली ऐसी घटना है जब विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक दलों के सरकार नहीं बना पाने के चलते अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल किया गया। कुल मिलाकर यह तीसरी बार है जब महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा है। वर्तमान का महाराष्ट्र एक मई 1960 को अस्तित्व आया था।

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 21 अक्टूबर को हुआ था और इसके परिणाम 24 अक्टूबर को आये थे। भाजपा 105 सीटों के साथ अकेली सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी, वहीं शिवसेना को 56 सीटें, राकांपा को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें आयी थीं। चुनाव पूर्व गठबंधन सहयोगी दलों भाजपा और शिवसेना ने कुल मिलाकर 161 सीटें जीती थीं। यह 288 सदस्यीय सदन में बहुमत के 145 के आंकड़े से काफी अधिक था। यद्यपि मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों के बीच खींचतान से दोनों में दरार पड़ गई और इससे सरकार गठन विलंबित हुआ।



गत सप्ताह भाजपा ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को सूचित कर दिया कि वह सरकार नहीं बना पाएगी क्योंकि उसके पास जरूरी संख्याबल नहीं है। इसके बाद राज्यपाल ने दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना को सरकार बनाने के लिए ''इच्छा और क्षमता" बताने को कहा। सोमवार (11 नवंबर) को उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने राज्यपाल से भेंट की और सरकार बनाने की इच्छा जतायी लेकिन वह अपनी जरूरी संख्या बल दिखाने के लिए अन्य पार्टियों से समर्थन का पत्र पेश करने में विफल रही।

यद्यपि यह तीसरी बार है जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। पहली बार राष्ट्रपति शासन फरवरी 1980 में लगाया गया था जब तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने शरद पवार नीत प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) सरकार बर्खास्त कर दी थी। उसी वर्ष जून में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस राज्य की सत्ता में वापस लौटी और ए आर अंतुले मुख्यमंत्री बने।

पवार 1978 से 1980 तक मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 1978 में तत्कालीन वसंतदादा पाटिल नीत सरकार गिराने के बाद पीडीएफ का गठन किया था। पवार पाटिल सरकार में एक मंत्री थे। गांधी ने 1980 के लोकसभा चुनाव में केंद्र की सत्ता में वापसी के बाद पीडीएफ सरकार बर्खास्त कर दी थी।

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महाराष्ट्र में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन 34 वर्ष बाद लगा। राष्ट्रपति शासन तब लगा जब पृथ्वीराज चव्हाण ने सहयोगी राकांपा द्वारा कांग्रेस नीत सरकार से 28 सितम्बर 2014 को समर्थन वापस लेने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। दोनों सहयोगी दलों के बीच विधानसभा सीटें और मुख्यमंत्री पद बराबर-बराबर बांटे जाने को लेकर दरार आ गई थी। 2014 में विधानसभा चुनाव राज्य में राष्ट्रपति शासन के बीच हुए थे।

अक्टूबर 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सत्ता में आयी और बाद में शिवसेना उनकी सरकार में शामिल हुई। भाजपा और शिवसेना ने चुनाव अलग-अलग लड़ा था। राज्यपाल कार्यालय द्वारा किये गये एक ट्वीट के अनुसार, ''वह संतुष्ट हैं कि सरकार को संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, (और इसलिए) संविधान के अनुच्छेद 356 के प्रावधान के अनुसार आज एक रिपोर्ट सौंपी गई है।" अनुच्छेद 356 को आमतौर पर राष्ट्रपति शासन के रूप में जाना जाता है और यह 'राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता से संबंधित है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार (12 नवंबर) को महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की। इसलिए यह पहली बार है जब राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक दलों के सरकार नहीं बना पाने के चलते अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल किया गया है।

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