अगेती आलू बोने की तैयारी करें किसान
जौनपुर, संवाददाता। किसान अगेती आलू की बुआई के लिए खेतों की तैयारी में जुट जाएं। सितंबर के पहले पखवाड़े में बुआई अवश्य करें। आलू संतुलित आहार देने वाली महत्वपूर्ण फसल है। इसकी अच्छे उत्पादन के लिए उपयुक्त भूमि, उर्वरक और सिंचाई की विधियों का पालन करना चाहिए।

जौनपुर, संवाददाता। अगेती आलू बोने के लिए किसान खेतों की तैयारी में लग जाएं। मौसम साफ होते ही खेत की जुताई करके तैयार करें। अच्छी उपज के लिए सितम्बर के पहले पखवारे भर में आलू की बुआई अवश्य कर दें। अगेती आलू की फसल 70 से 80 दिन में पक कर तैयार हो जाएगी। उसकी खुदाई करने के बाद किसान उसी खेत में पिछेती गेहूं की बुआई कर सकते हैं। आलू संतुलित आहार देने वाली एक महत्वपूर्ण फसल है। इसमें लगभग 20.6 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 2.1 प्रतिशत प्रोटीन, 0.3 प्रतिशत वसा तथा 0.9 प्रतिशत खनिज पदार्थ समेत विटामिन बी-1 व सी भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। भारतीय अर्थ व्सवस्था में आलू का योगदान दो प्रतिशत है। किसान शस्य क्रियाओं को अपनाकर आलू का अधिक उत्पादन ले सकते हैं।
आलू के लिए भूमि
आलू की अच्छी उपज के लिए बलुई या हल्की दोमट भूमि जिसमें पर्याप्त जीवांश पदार्थ हों, सबसे उपयुक्त होती है। बुआई के लिए मिट्टी भुरभुरी व पर्याप्त नमीं युक्त होनी चाहिए। हल्की भुरभुरी व जीवांश युक्त मिट्टी में उचित तापक्रम तथा वायु संचार होने से कन्द का विकास अच्छा होता है और खुदाई भी आसान होती है। आलू के लिए भूमि का अधिक अम्लीय या क्षारीय होना हानिप्रद होता है। इसके लिए भूमि का पीएच मान 6-7 सबसे अच्छा माना जाता है। बुआई से पहले बीज का उपचार अवश्य करें।
उर्वरकों का प्रयोग
आलू के लिए प्रति हेक्टेयर 180 किग्रा नाइट्रोजन, 100 किग्रा फास्फोरस तथा 80 किग्रा पोटाश की आवश्यकता होती है। इसके लिए एनपीके 315 किग्रा तथा यूरिया 350 किग्रा प्रयोग करना चाहिए। यदि पोटाश की अधिक आवश्यकता हो तो म्यूरेटा पोटाश देकर पूरा कर देना चाहिए। 75 किग्रा यूरिया का प्रयोग वेसल ड्रेसिंग के रूप में तथा शेष मात्रा मिट्टी चढ़ाते समय देना चाहिए।
सिंचाई व निकाई गुणाई:
पहली सिंचाई बुआई के 15 से 18 दिन बाद करना चाहिए। इस बात का ध्यान रहे कि मेड़ आधे से अधिक नहीं डूबे। उसके बाद 10 से 15 दिन के अन्तर पर 8 से 10 सिंचाई करना आवश्यक है। आलू के पौधे जब 12 से 15 सेमी के हो जाएं तो एक हल्की सिंचाई करके ओट आने पर खुरपी से खरपतवार निकाल दें। फिर कुदाल से मिट्टी भुरभुरी करके यूरिया देकर मिट्टी चढ़ा दें। यूरिया उस समय दें जब ओस न रहे।
“किसान अगेती आलू की बुआई करें। इससे जब बाजार में आलू महंगा होगा तब उन्हें खरीदना नहीं पड़ेगा। इतना आलू बोएं कि खुद प्रयोग करें और बाजार में भी बेचें। जिससे अच्छा लाभ होगा। 15 से 20 सितम्बर के बीच बुआई अवश्य कर दें। ताकि खेत समय से खाली हो जाए। ”
डॉ.सीमा सिंह राणा, जिला उद्यान अधिकारी, जौनपुर


