टंडवा के छोटे कारोबारी के बेटे ने नीट में लहराया परचम
टंडवा के कुंडी गांव के निवासी प्रवीण कुमार ने तीन प्रयासों के बाद नीट परीक्षा में 557 अंक और 31 हजार रैंक लाकर डॉक्टर बनने का सपना साकार किया है। प्रवीण की माता-पिता की मेहनत और त्याग के चलते उसकी सफलता केवल उसके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का मुद्दा है।

टंडवा, निज प्रतिनिधि। टंडवा के कुंडी गांव निवासी प्रवीण कुमार ने अपने परिश्रम से नीट परीक्षा में परचम लहराया है। मगध से प्रभावित इस छोटे से गांव के बांस कारोबारी के बेटे ने नीट 2025 में 557 अंक और 31 हजार रैंक लाकर डॉक्टर बनने का अपना सपना साकार करने की तरफ पहला कदम रख दिया है। तीन बार की कोशिश आखिरकार रंग लाई। प्रवीण के पिता खुशियाल साहू रांची में बांस खरीद-बिक्री का छोटा कारोबार करते हैं। मां सीसीएल दरभंगा हाउस में कर्मी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद माता-पिता ने बेटे के सपने को पंख दिए।
प्रवीण की पढ़ाई रांची के डीपीएस स्कूल से हुई। डॉक्टर बनने की जिद लेकर वह तैयारी के लिए कोटा चला गया। 2024 में पहली बार 1.80 लाख रैंक आई, उम्मीदें टूटीं 2025 में दूसरी बार फिर 1.8 लाख रैंक मिली, निराशा हुई। 2025 में तीसरी बार 557 अंक, 31 हजार रैंक और डॉक्टर बनने का रास्ता खुल गया, प्रवीण ने बताया कि पिछले दो बार केरिजल्ट देखकर हताशा जरूर आई थी पर माता-पिता ने हिम्मत नहीं टूटने दी। तीसरी बार मैं पूरी तरह तैयार था। बचपन से सर्जन बनने का सपना था, अब वह पूरा होता दिख रहा है। इधर, प्रवीण की इस सफलता से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरा टंडवा गौरवान्वित है। प्रवीण अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के त्याग और सहयोग को देते हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि झारखंड के किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल जाएगा और वह सर्जन बनने का सपना पूरा करेंगे। प्रवीण की कहानी हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है जो बार-बार असफल होने के बाद हार मान लेता है। छोटे कारोबारी के घर से निकला ये बेटा साबित करता है कि संसाधन कम हों तो भी लगन से मंजिल मिलती है।
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