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हिंदी न्यूज़ देशतीन राउंड मीटिंग के बाद अब 3 दिन में रिपोर्ट, प्रशांत किशोर के प्रस्तावों पर होगा फैसला

तीन राउंड मीटिंग के बाद अब 3 दिन में रिपोर्ट, प्रशांत किशोर के प्रस्तावों पर होगा फैसला

प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के सामने तीन राउंड मीटिंग हो चुकी है। अब तीन दिन में रिपोर्ट आएगी, जिसमें स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशांत किशोर के प्रस्ताव पर कांग्रेस पार्टी क्या सोचती है?

तीन राउंड मीटिंग के बाद अब 3 दिन में रिपोर्ट, प्रशांत किशोर के प्रस्तावों पर होगा फैसला
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 20 Apr 2022 10:23 PM

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चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) ने आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर 'नौकरी के लिए इंटरव्यू' का एक और दौर किया। तीन राउंड की मीटिंग हो चुकी है अब तीन दिन में रिपोर्ट आएगी और तय हो जाएगा कि प्रशांत किशोर के प्रस्ताव पर कांग्रेस क्या निर्णय लेती है? उनके प्रस्ताव का मूल्यांकन करने वाली टीम के अलावा कांग्रेस पार्टी के दो और नेता थे, जिनमें अशोक गहलोत और भूपेश बघेल शामिल थे। कांग्रेस सूत्रों ने कहा है कि इस मामले पर 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट आने की उम्मीद है। बैठक में प्रशांत किशोर के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में जयराम रमेश, अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल और सोनिया गांधी ने भी भाग लिया था।

बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी प्रशांत किशोर के प्रस्तावों का 'मूल्यांकन' कर रही है। उन्होंने कहा, "कई अन्य लोगों के इनपुट पर भी विचार किया जा रहा है और अगले 72 घंटों के भीतर कांग्रेस अध्यक्ष को अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी।"

इससे पहले अधिकांश कांग्रेस नेताओं ने प्रशांत किशोर के प्रस्तावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह गुजरात के लिए केवल एक बार का प्रस्ताव था। बाद में किशोर के संगठन IPAC ने कहा कि इसमें कांग्रेस का कायाकल्प और 2024 के आम चुनावों की रणनीति शामिल है। किशोर के पार्टी में प्रवेश का भी सवाल है - जिसके लिए बातचीत पिछले साल हुई थी।

क्या है पीके की ताकत
प्रशांत किशोर देश के जाने-माने राजनीतिक गणितज्ञ और विश्लेषक माने जाते हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि किशोर की ताकत डाटा विश्लेषण है और पार्टी के फायदे के लिए पीके का होना जरूरी है। हालांकि दूसरी ओर प्रशांत किशोर की एंट्री को गांधी परिवार के लिए एक अतिरिक्त बोझ के रूप में भी देखा जा रहा है, जो पहले से ही पार्टी नेतृत्व के एक हिस्से से असंतोष का सामना कर रहे हैं। गांधी परिवार के वफादार माने जाने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, "हमने दूसरों का भी इस्तेमाल किया है और हमें देखना होगा कि क्या करने की जरूरत है?"

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